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किसानों के लिए बड़ी खबर: अब खाद के लिए नहीं लगानी पड़ेगी लंबी कतार, घर बैठे होगी यूरिया-डीएपी की बुकिंग

6 hours ago
किसानों के लिए बड़ी खबर: अब खाद के लिए नहीं लगानी पड़ेगी लंबी कतार, घर बैठे होगी यूरिया-डीएपी की बुकिंग

किसानों के लिए बड़ी खबर: अब खाद के लिए नहीं लगानी पड़ेगी लंबी कतार, घर बैठे होगी यूरिया-डीएपी की बुकिंग

जयपुर। राजस्थान में किसानों को यूरिया और डीएपी खाद के लिए लंबी कतारों और बार-बार खाद वितरण केंद्रों के चक्कर लगाने से राहत मिलने वाली है। कृषि विभाग 15 अगस्त के बाद प्रदेशभर में खाद की ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है। नई व्यवस्था शुरू होने के बाद किसान घर बैठे मोबाइल एप के जरिए खाद बुक कर सकेंगे और एप ही बताएगा कि उनके आसपास किस वितरण केंद्र पर खाद उपलब्ध है। कृषि विभाग के अनुसार इसके अगले चरण में खाद की होम डिलीवरी शुरू करने की भी योजना है। हालांकि, घर तक खाद पहुंचाने की व्यवस्था कब से लागू होगी, इसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है।

एफएफएस एप से घर बैठे होगी बुकिंग

किसान एफएफएस (Framework for Fertilizer Sale) एप डाउनलोड कर खाद की बुकिंग कर सकेंगे। एप में किसान को पहले अपना राज्य, जिला और गांव चुनना होगा। इसके बाद आधार या फार्मर आईडी के जरिए पहचान सत्यापित की जाएगी। वेरिफिकेशन के बाद किसान की जमीन, रकबा और फसल से संबंधित जानकारी एप पर दिखाई देगी। किसान द्वारा बोई गई फसल और जमीन के रकबे के आधार पर खाद की आवश्यकता तय होगी। इसके बाद एप किसान को आसपास के उन सरकारी सहकारी केंद्रों और निजी खाद विक्रेताओं की जानकारी देगा, जहां खाद उपलब्ध होगी। किसान अपनी सुविधा के अनुसार वितरण केंद्र का चयन कर सकेगा।

बुकिंग के बाद मिलेगा डिजिटल टोकन

खाद की ऑनलाइन बुकिंग पूरी होने के बाद किसान के लिए बुकिंग आईडी और क्यूआर कोड जारी होगा। यही डिजिटल टोकन होगा। किसान इसी टोकन को दिखाकर चुने गए वितरण केंद्र या अधिकृत निजी रिटेलर से खाद प्राप्त कर सकेगा जिन किसानों को मोबाइल एप चलाना नहीं आता, उनके लिए भी व्यवस्था की गई है। ऐसे किसान ई-मित्र के माध्यम से खाद की बुकिंग करा सकेंगे। इसके लिए किसान को अपनी फार्मर आईडी उपलब्ध करानी होगी।

एप पर पता चलेगा खाद कहां उपलब्ध है

नई व्यवस्था में किसानों को खाद की उपलब्धता के लिए अलग-अलग दुकानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। एप पर आसपास के सरकारी और निजी खाद विक्रेताओं की लोकेशन और उपलब्धता की जानकारी दिखाई जाएगी। कृषि विभाग के अनुसार प्रदेश में अब तक करीब 88 लाख किसानों की फार्मर आईडी तैयार हो चुकी हैं। इनमें किसान की जमीन, रकबा, डिजिटल नक्शे और फसल से संबंधित जानकारी दर्ज है। फार्मर आईडी को जनाधार से भी लिंक किया गया है।

सहकारी समिति या निजी रिटेलर, किसान के पास विकल्प

किसानों को खाद लेने के लिए दो विकल्प दिए जाएंगे। यदि किसान किसी सहकारी समिति का सदस्य है तो वह अपनी समिति से खाद ले सकता है। वहीं, सहकारी समिति का सदस्य नहीं होने पर किसान एप के माध्यम से नजदीकी निजी रिटेलर का चयन कर वहां से खाद प्राप्त कर सकेगा।

खाद का रेट और बिल भी मिलेगा

ऑनलाइन बुकिंग के दौरान किसान को खाद से जुड़ी जानकारी एप पर मिल सकेगी। बुकिंग के बाद ओटीपी की प्रक्रिया पूरी होगी। खाद प्राप्त करने के बाद किसान को बिल भी दिया जाएगा, जिसमें खाद के कट्टों की संख्या और उनकी कीमत का विवरण दर्ज होगा। इससे किसान को यह पता रहेगा कि उसे कितनी खाद मिली और उसके लिए कितना भुगतान किया गया।

डिजिटल टोकन सिर्फ 48 घंटे रहेगा वैध

ऑनलाइन बुकिंग के बाद जारी होने वाला डिजिटल टोकन 48 घंटे तक वैध रहेगा। यदि किसान इस अवधि में खाद नहीं लेता है तो टोकन स्वतः निरस्त हो जाएगा। इसके बाद किसान को दोबारा बुकिंग करनी होगी।

15 अगस्त के बाद शुरू करने की तैयारी

कृषि विभाग के कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के अनुसार ऑनलाइन खाद बुकिंग व्यवस्था लागू करने की तैयारियां पूरी की जा रही हैं। किसानों, खाद डीलरों और संबंधित अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जा रही है। विभाग का लक्ष्य 15 अगस्त 2026 के बाद प्रदेशभर में यह व्यवस्था लागू करने का है। हालांकि इसके लिए केंद्र सरकार की स्वीकृति का इंतजार है।

डीलर के पास कितना स्टॉक है, LIVE दिखेगा

नई व्यवस्था का एक बड़ा फायदा यह होगा कि कृषि विभाग के अधिकारियों को खाद विक्रेताओं के पास उपलब्ध स्टॉक की लाइव जानकारी मिल सकेगी। इससे स्टॉक उपलब्ध होने के बावजूद किसान को खाद नहीं मिलने या डीलर द्वारा स्टॉक नहीं होने का दावा करने जैसी शिकायतों पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी। खाद की बिक्री और वितरण का डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार होगा।

होम डिलीवरी की भी तैयारी

ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था के बाद कृषि विभाग खाद की होम डिलीवरी शुरू करने के मॉडल पर भी काम कर रहा है। इसके लिए ज्यादा संख्या में वितरण केंद्र और बेहतर लॉजिस्टिक व्यवस्था की जरूरत होगी। फिलहाल होम डिलीवरी की योजना पर काम चल रहा है, लेकिन इसे प्रदेशभर में कब से शुरू किया जाएगा, इसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है।

कालाबाजारी पर भी लगेगी रोक

यूरिया पर केंद्र सरकार की ओर से बड़ी सब्सिडी दी जाती है। इसके कारण खाद के गैर-कृषि उपयोग और कालाबाजारी की शिकायतें सामने आती रहती हैं। ऑनलाइन बुकिंग और डिजिटल रिकॉर्ड की व्यवस्था से खाद की बिक्री और वितरण पर निगरानी बढ़ाने में मदद मिलेगी। हर किसान को कितनी खाद मिली, किस केंद्र से मिली और कितने मूल्य पर मिली—इसका रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगा।

10 लाख किसानों की फार्मर आईडी अभी लंबित

कृषि विभाग के अनुसार प्रदेश में करीब 88 लाख किसानों की फार्मर आईडी बन चुकी है, जबकि करीब 10 लाख किसानों की फार्मर आईडी अभी लंबित है। आने वाले समय में विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए फार्मर आईडी को अनिवार्य करने की भी तैयारी की जा रही है। इससे किसान को मिलने वाली अलग-अलग योजनाओं और लाभों का रिकॉर्ड एक ही जगह उपलब्ध रहेगा और पात्र किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में मदद मिलेगी।

कुल मिलाकर नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसानों को खाद के लिए लंबी कतारों में खड़े रहने के बजाय पहले ऑनलाइन बुकिंग करनी होगी। एप से खाद की उपलब्धता, वितरण केंद्र, डिजिटल टोकन और बिल की जानकारी मिलने से खाद वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

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