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सुप्रीम कोर्ट सख्त: खतरनाक कुत्तों को दे मौत का इंजेक्शन! अधिकारियों को दिए निर्देश

rk
7 hours ago
सुप्रीम कोर्ट सख्त: खतरनाक कुत्तों को दे मौत का इंजेक्शन! अधिकारियों को दिए निर्देश

सुप्रीम कोर्ट सख्त: खतरनाक कुत्तों को दे मौत का इंजेक्शन! अधिकारियों को दिए निर्देश

नई दिल्ली। आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि रेबीज संक्रमित और बेहद खतरनाक कुत्तों को जरूरत पड़ने पर इंजेक्शन देकर मारा जा सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि लोगों की सुरक्षा सबसे जरूरी है और आदेशों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों पर अवमानना की कार्रवाई हो सकती है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चिंता जताई कि अकेले राजस्थान के Sri Ganganagar में एक महीने में कुत्तों के काटने के 1084 मामले सामने आए। वहीं Tamil Nadu में साल के पहले चार महीनों में करीब 2 लाख डॉग बाइट के मामले दर्ज हुए। मामले की सुनवाई जस्टिस Vikram Nath, Sandeep Mehta और N V Anjaria की बेंच ने की।

सुप्रीम कोर्ट के 9 बड़े निर्देश
राज्य सरकारें पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) के नियमों को सख्ती से लागू करें।
हर जिले में कम से कम एक पूर्ण रूप से संचालित ABC सेंटर (एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर) बनाया जाए।
ज्यादा आबादी वाले क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार ABC सेंटरों की संख्या बढ़ाई जाए।
कोर्ट के आदेशों और पशु कल्याण नियमों का पूरी तरह पालन कराया जाए।
जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी ये नियम लागू किए जाएं।
एंटी-रेबीज दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
National Highways Authority of India (NHAI) राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए व्यवस्था बनाए।
रेबीज संक्रमित या बेहद खतरनाक कुत्तों के मामलों में कानून के तहत यूथेनेशिया (दया मृत्यु) जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
कोर्ट के आदेश लागू करने वाले नगर निगम और सरकारी अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा दी जाए और सामान्य स्थिति में उनके खिलाफ FIR दर्ज न की जाए।
पहले भी जारी हो चुके थे निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि कुत्तों को शेल्टर होम में रखा जाए और दोबारा सड़कों पर न छोड़ा जाए।  इसके साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर रोक लगाने के भी निर्देश दिए गए थे।

29 जनवरी को कोर्ट ने कहा था- हमारी बात मजाक न समझें
29 जनवरी की सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि यदि आवारा कुत्तों के हमले में किसी की मौत या चोट होती है तो नगर निकायों के साथ डॉग फीडर्स की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि उसकी बातों को मजाक समझना गलत होगा और स्थानीय प्रशासन की विफलता पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।

Sanskar
BC

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