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पश्चिमी राजस्थान में जल सुरक्षा केा मिल रही मजबूती, 1274 करोड़ रूपए स्वीकृति

Bansal
6 hours ago
पश्चिमी राजस्थान में जल सुरक्षा केा मिल रही मजबूती, 1274 करोड़ रूपए स्वीकृति

राजस्थान फस्र्ट न्यूज,बीकानेर। पश्चिमी राजस्थान का विशाल मरुस्थलीय क्षेत्र लंबे समय से कम वर्षा, अनियमित मानसून, भूजल स्तर में गिरावट तथा खारे और लवणीय भूजल जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में इंदिरा गांधी नहर परियोजना पश्चिमी राजस्थान में पेयजल एवं सिंचाई जल उपलब्धता का प्रमुख आधार बनी हुई है। नहर प्रणाली के सुदृढ़ीकरण और जल संचयन से क्षेत्र में कृषि, पेयजल, ऊर्जा एवं औद्योगिक गतिविधियों को भी मजबूती मिल रही है।

 


पश्चिमी राजस्थान के अनेक क्षेत्रों में प्राकृतिक जल संसाधन सीमित हैं। कई स्थानों पर भूजल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है अथवा उसकी गुणवत्ता पेयजल एवं कृषि उपयोग के अनुकूल नहीं है। ऐसे में नहर के माध्यम से उपलब्ध सतही जल लाखों लोगों के लिए पेयजल का महत्वपूर्ण स्रोत है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ अनेक शहरों और कस्बों की पेयजल आपूर्ति भी नहर आधारित व्यवस्था से जुड़ी हुई है।

 


राज्य सरकार द्वारा नहर प्रणाली को सुदृढ़ करने, सिंचाई जल की दक्षता बढ़ाने तथा खेतों तक पानी की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न कार्य करवाए जा रहे हैं। इनमें जलाशय निर्माण, फव्वारा पद्धति से सिंचाई, जर्जर खालों और नहरों का जीर्णोद्धार सहित जल प्रबंधन से जुड़े कार्य शामिल हैं।


चार एस्केप रिजर्वायर होंगे विकसित
पश्चिमी राजस्थान में जल संचयन, सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा पेयजल उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से इंदिरा गांधी नहर परियोजना के अंतर्गत चार एस्केप रिजर्वायरों को जल भंडारण स्रोत के रूप में विकसित किया जा रहा है। आरडी 507, आरडी 750, आरडी 1121 एवं आरडी 1356 स्थित इन रिजर्वायरों के विकास के लिए 1,274.26 करोड़ रुपए की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी की गई है। चारों रिजर्वायरों की कुल प्रस्तावित भंडारण क्षमता 8,746 एमसीएफटी है।

 

2.20 लाख हेक्टेयर में खालों का जीर्णोद्धार
आईजीएनपी क्षेत्र में जल संचयन के साथ सिंचाई प्रणाली को मजबूत करने के लिए स्प्रिंकलर, वाटर कोर्स और नहरों के जीर्णोद्धार के कार्य भी किए जा रहे हैं। बजट घोषणा वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के तहत वर्तमान में कुल 2,20,377 हेक्टेयर क्षेत्र में खालों के जीर्णोद्धार तथा 1,18,248 हेक्टेयर क्षेत्र में स्प्रिंकलर सिंचाई सुविधा स्थापित करने के कार्य प्रगतिरत हैं।


इसके साथ ही सागरमल गोपा शाखा एवं बाबा रामदेव उपशाखा प्रणाली के आसुतार वितरिका तंत्र सहित अन्य नहरी तंत्र, फलौदी लिफ्ट नहर, मुख्य नहर के दोनों पटड़ों का सुदृढ़ीकरण, बाबा रामदेव शाखा, कोलायत वितरिका तथा खिदरत वितरिका के जीर्णोद्धार के कार्य भी प्रगति पर हैं।

 

वर्ष 2026-27 में 550 करोड़ रुपए के कार्य
बजट घोषणा वर्ष 2026-27 के अंतर्गत कुल 33,543 हेक्टेयर क्षेत्र में खालों के जीर्णोद्धार, सागरमल गोपा शाखा पर बैलेंसिंग रिजर्वायर के निर्माण तथा गजनेर लिफ्ट नहर एवं कोलायत लिफ्ट नहर के जीर्णोद्धार के कार्यों के लिए कुल 550 करोड़ रुपए की घोषणाएं की गई हैं।

 

कृषि से लेकर उद्योग तक मिल रहा लाभ
इंदिरा गांधी नहर परियोजना पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलीय और अल्पवर्षा वाले क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास की आधारभूत परियोजना है। नहर निर्माण एवं जीर्णोद्धार से सिंचाई सुविधा मजबूत होने के कारण कृषि उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि के साथ कृषि आधारित आर्थिक गतिविधियों को भी स्थायित्व मिला है।


नहर परियोजना से पश्चिमी, उत्तरी एवं मध्य राजस्थान के 13 जिलों की पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान मिल रहा है। इसके अलावा सीमा सुरक्षा बल एवं भारतीय सेना के लिए पेयजल उपलब्ध कराने तथा ऊर्जा एवं औद्योगिक परियोजनाओं की जल आवश्यकताओं की पूर्ति में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान है।


नहर प्रणाली के विस्तार, सुदृढ़ीकरण और जल संचयन से मरुस्थलीय क्षेत्र में कृषि, पेयजल, ऊर्जा, उद्योग और रोजगार के अवसरों का विस्तार हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति मिली है। वर्तमान में किए जा रहे निर्माण एवं जीर्णोद्धार कार्य पश्चिमी राजस्थान की जल सुरक्षा को मजबूत करने के साथ क्षेत्र के आर्थिक एवं सामाजिक विकास को दीर्घकालीन आधार प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

BC

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