Khulasa Online
Breaking
• बड़ी खबर: NEET परीक्षा 2026 रद्द, 22 लाख छात्रों ने दी थी परीक्षा, दोबारा होगा पेपर! • राजस्थान में सस्ती बिजली पर संकट: सोलर ओवरफ्लो से लाखों यूनिट बिजली बेकार • बड़ी खबर: बिल्डिंग में लगी भीषण आग, नौ लोगो की मौत,कुछ के सिर्फ कंकाल मिले • हादसा: तेज आंधी में डूबा क्रूज, 9 की मौत, कई अब भी लापता • बीकानेर में दर्दनाक हादसा: पशु से टकराई बाइक, युवक की मौत • बड़ी खबर: NEET परीक्षा 2026 रद्द, 22 लाख छात्रों ने दी थी परीक्षा, दोबारा होगा पेपर! • राजस्थान में सस्ती बिजली पर संकट: सोलर ओवरफ्लो से लाखों यूनिट बिजली बेकार • बड़ी खबर: बिल्डिंग में लगी भीषण आग, नौ लोगो की मौत,कुछ के सिर्फ कंकाल मिले • हादसा: तेज आंधी में डूबा क्रूज, 9 की मौत, कई अब भी लापता • बीकानेर में दर्दनाक हादसा: पशु से टकराई बाइक, युवक की मौत
Arham School
jeevan raksha
Sambhav Hospital
Bansal Group
Bharti
Trade Fair

राजस्थान में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका 35 प्रतिशत तक महंगा होगा रूफटॉप सोलर, 1 जून से नया नियम लागू

rk
6 hours ago
राजस्थान में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका 35 प्रतिशत तक महंगा होगा रूफटॉप सोलर, 1 जून से नया नियम लागू


राजस्थान में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका 35 प्रतिशत तक महंगा होगा रूफटॉप सोलर, 1 जून से नया नियम लागू
जयपुर।  राजस्थान में बिजली उपभोक्ताओं को बिजली खर्च बचाने की कवायद को बड़ा झटका लगने वाला है। प्रदेश में आगामी एक जून से सोलर प्रोजेक्ट्स में स्वदेशी सोलर मॉड्यूल सेल (डीसीआर) के साथ लगाना अनिवार्य किया जा रहा है। इसके बाद सभी नए सोलर पैनल पूरी तरह स्वदेशी होंगे। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की तय समय सीमा से सोलर इंडस्ट्री में चिंता बढ़ गई है। इसका सीधा असर रूफटॉप सोलर लगाने वाले आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा।डवलपर्स और उद्योग संगठनों का कहना है कि देश में डीसीआर मॉड्यूल की उत्पादन क्षमता मांग के मुकाबले काफी कम है, जिससे सोलर प्रोजेक्ट्स की लागत 25 से 35 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। सोलर डवलपर्स संगठनों ने ऊर्जा विभाग और मंत्रालय को पत्र भेजकर समय सीमा बढ़ाने की जरूरत जताई है। उनका कहना है कि ऐसा नहीं होने पर कई सोलर प्रोजेक्ट्स की रफ्तार थम सकती है।उपभोक्ता पर पड़ेगी मारविशेषज्ञों के अनुसार देश में डीसीआर मॉड्यूल की वास्तविक उत्पादन क्षमता फिलहाल 15-20 गीगावाट है, जबकि सालाना मांग करीब 50 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। मांग और  आपूर्ति के इस बड़े अंतर से मॉड्यूल की कीमतों में बढो़तरी हो रही है। डवलपर्स का कहना है कि अब तक पांच किलोवाट से अधिक क्षमता के कई रूफटॉप सिस्टम कम लागत वाले नॉन-डीसीआर मॉड्यूल से लगाए जा रहे थे, लेकिन अब यह विकल्प खत्म होने से आम उपभोक्ताओं के लिए रूफटॉप सोलर महंगा पड़ सकता है। कीमतें बढऩे पर रूफटॉप सोलर सिस्टम आम बिजली उपभोक्ताओं की पहुंच से बाहर होना तय है। ऐसे में बिजली बिलों की मार बढऩे की आशंका है।
5 किलोवाट रूफटॉप सिस्टम 65 हजार तक महंगासोलर डवलपर्स का दावा है कि नॉन-डीसीआर मॉड्यूल जहां 13-15 रुपए प्रति वाट तक उपलब्ध है, वहीं डीसीआर मॉड्यूल 22 रुपए प्रति वाट या उससे अधिक कीमत पर मिल रहे हैं। उन्होंने डीसीआर उत्पादन क्षमता और बाजार मांग का स्वतंत्र आकलन कराने की जरूरत जताई है। दावा किया है कि पहले 5 किलोवाट का रूफटॉप सिस्टम बिना सब्सिडी करीब 2.40 लाख रुपए में लग रहा था, जो बढक़र करीब 3.05 लाख रुपए तक पहुंच सकता है। यानि उपभोक्ता को 5 किलोवाट क्षमता वाले रूफटॉप सोलर लगाने के लिए जेब से 65 हजार रुपए अतिरिक्त खर्च करने होंगे। जिसके चलते आम उपभोक्ता का सोलर सिस्टम से मोहभंग होना तय है।

Sanskar
BC

Join for Latest News

हमारे चैनल से जुड़ें और सभी अपडेट सबसे पहले पाएँ

Share: