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कतरियासर की पावन धरा पर पेड़ों की कटाई और हिरणों के जीवन पर संकट! मुकेश बन ने जताई गहरी चिंता, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग

Bansal
6 hours ago
कतरियासर की पावन धरा पर पेड़ों की कटाई और हिरणों के जीवन पर संकट! मुकेश बन ने जताई गहरी चिंता, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग


कतरियासर की पावन धरा पर पेड़ों की कटाई और हिरणों के जीवन पर संकट! मुकेश बन ने जताई गहरी चिंता, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
बीकानेर। बीकानेर जिले के प्रसिद्ध धार्मिक एवं ऐतिहासिक धाम कतरियासर में जल ग्रहण योजना के अंतर्गत चल रहे प्रोजेक्ट को लेकर पेड़ों की कथित कटाई और वन्यजीवों, विशेषकर हिरणों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस मामले को लेकर भारत तिब्बत सहयोग मंच के जिला अध्यक्ष मुकेश बन ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन एवं संबंधित विभागों से तत्काल हस्तक्षेप कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
मुकेश बन ने कहा कि कतरियासर केवल एक गांव या सामान्य स्थान नहीं है, बल्कि यह गुरु जसनाथ जी महाराज एवं माता काल्लदे की पावन अवतार भूमि के रूप में विशेष धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व रखता है। इस क्षेत्र की पहचान यहां की धार्मिक परंपराओं, प्राकृतिक वातावरण और वन्यजीवों से भी जुड़ी हुई है। ऐसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में यदि विकास कार्यों के नाम पर पेड़ों की कटाई हो रही है और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंच रहा है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है।
उन्होंने कहा कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन विकास के नाम पर पर्यावरण, प्रकृति और वन्यजीवों की सुरक्षा की अनदेखी किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। किसी भी सरकारी योजना का उद्देश्य जनहित होना चाहिए। योजना के क्रियान्वयन में पर्यावरण संरक्षण एवं वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
ठेकेदार एवं कंपनी की भूमिका की जांच की मांग
भारत तिब्बत सहयोग मंच के जिला संयोजक (प्रगति प्रकोष्ठ) रामकिशन सिद्ध ने इस मामले में आरोप लगाया है कि जल ग्रहण योजना के अंतर्गत चल रहे कार्य में ठेकेदार पप्पू राम एवं विकास कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा खुलेआम पेड़ों की कटाई की जा रही है। उनका आरोप है कि ठेकेदार ग्रामीणों को यह कहकर जवाब दे रहा है कि उसे पेड़ काटने का ठेका दिया गया है तथा संबंधित अधिकारियों की ओर से लिखित अनुमति प्राप्त है।
रामकिशन सिद्ध के अनुसार, जब ग्रामीणों ने पेड़ों की कटाई का विरोध किया और इस संबंध में सवाल उठाए तो उन्हें कथित रूप से धमकाया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी शिकायतों पर संबंधित अधिकारी गंभीरता से सुनवाई नहीं कर रहे हैं। इससे क्षेत्र के लोगों में नाराजगी और चिंता का माहौल है।
रामकिशन सिद्ध ने जामसर थाने में दर्ज करवाई एफआईआर
इस पूरे मामले को लेकर भारत तिब्बत सहयोग मंच के जिला संयोजक (प्रगति प्रकोष्ठ) रामकिशन सिद्ध ने जामसर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच करने तथा पेड़ों की कटाई, कथित धमकियों और संबंधित अनुमति दस्तावेजों की जांच करने की मांग की है।
मुकेश बन ने प्रशासन के सामने रखीं प्रमुख मांगें
भारत तिब्बत सहयोग मंच के जिला अध्यक्ष मुकेश बन ने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों से मांग की है कि:
कतरियासर में चल रहे जल ग्रहण योजना के कार्य की तत्काल जांच करवाई जाए।
जांच पूरी होने तक विवादित क्षेत्र में पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगाई जाए।
ठेकेदार पप्पू राम एवं विकास कंस्ट्रक्शन कंपनी को दी गई अनुमति और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाए।
पेड़ों की कटाई के संबंध में वन विभाग एवं संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच हो।
क्षेत्र में रहने वाले हिरणों एवं अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखा जाए।
ग्रामीणों को कथित रूप से धमकाने के मामले में उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
यदि जांच में किसी ठेकेदार, अधिकारी या अन्य व्यक्ति की लापरवाही अथवा नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो उसके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों की शिकायतों पर तत्काल सुनवाई कर उन्हें न्याय एवं सुरक्षा प्रदान की जाए।
धार्मिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी सभी की
मुकेश बन ने कहा कि कतरियासर की पवित्र भूमि, यहां की धार्मिक मान्यताओं, पेड़-पौधों और वन्यजीवों की रक्षा करना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। प्रकृति और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाकर विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। प्रशासन को इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की आवाज को अनसुना नहीं किया जाना चाहिए। यदि किसी योजना के कार्य में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति या कंपनी को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता।
भारत तिब्बत सहयोग मंच ने प्रशासन से मांग की है कि कतरियासर की धार्मिक पहचान, प्राकृतिक संपदा और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए तत्काल ठोस कार्रवाई की जाए तथा पूरे मामले में पारदर्शी जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानून सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

BC

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