अब छोटे बच्चे जायेंगे स्कूल, बड़ों का अवकाश, दोहरा व्यवहार आखिर क्यों
अब छोटे बच्चे जायेंगे स्कूल, बड़ों का अवकाश, दोहरा व्यवहार आखिर क्यों
बीकानेर। सरकार के विभाग किस तरह बिना किसी जानकारी के कामकाज कर रहे है। इसकी बानगी उनके आदेशों में देखने को मिलती है।जब शिक्षा से जुड़े दो अलग अलग विभाग के आदेश स्वयं ही अपने आप को हंसी का पात्र बनाते नजर आते है।जिसमें नौनिहाल तो तेज गर्मी में स्कूल जाने को मजबूर है और बड़ों को अवकाश कर दिया जाता है।जी हां हम बात कर रहे है राजस्थान सरकार,आयुक्तालय,कॉलेज शिक्षा,राजस्थान,जयपुर के संयुक्त निदेशक अकादमी प्रो.विजय सिंह जाट के उस आदेश की।जिसमें राज्य के सभी प्राचार्य,समस्त राजकीय महाविद्यालय,राजस्थान को पत्र जारी कर महाविद्यालयों में ग्रीष्मावकाश सत्र 2025-26 के लिए अकादमिक कैलेण्डर जारी किया था,जिसके क्रम में महाविद्यालयों में ग्रीष्मावकाश एक मई से 30 जून तक रहेगा। इस क्रम में प्राचार्य अध्यापन कार्य,ऑनलाईन प्रवेश प्रक्रिया,परीक्षा तथा भौतिक सत्यापन एवं अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए आवश्यकतानुसार संकाय सदस्यों को ग्रीष्मावकाश के दौरान महाविद्यालय में रोक सकते है तथा इस हेतु रोके गए संकाय सदस्यों को 92 (ब) के तहत उपस्थिति के आधार पर आनुपातिक रूप से उपार्जित अवकाश का लाभ प्राचार्य स्तर से स्वीकृत किया जायेगा। प्राचार्य एवं कार्यवाहक प्राचार्य के संबंध में उक्त लाभ एचआरडी शाखा स्तर से स्वीकृत किया जायेगा।जबकि दूसरी ओर राज्य में सरकारी स्कूलों में नन्हें नन्हें बच्चों का ग्रीष्मावकाश 17 मई से 20 जून तक शिविरा पचाग में जारी किया गया है। वर्तमान में पड़ रही भीषण गर्मी में छोटे बच्चे 17 मई तक स्कूल जाएंगे जबकि बड़े बच्चों का एक मई से ग्रीष्मावकाश रहेगा। इस प्रकार एक ही राज्य में दोहरा व्यवहार कहां तक न्यायसंगत है।
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