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पंचायती राज के संवैधानिक अधिकारों पर आधारित जन-जागरूकता पोस्टर का विमोचन

Bansal
7 hours ago
पंचायती राज के संवैधानिक अधिकारों पर आधारित जन-जागरूकता पोस्टर का विमोचन

पंचायती राज के संवैधानिक अधिकारों पर आधारित जन-जागरूकता पोस्टर का विमोचन
संसद सेवा केंद्र में रविशेखर मेघवाल ने किया विमोचन, पंचायती राज व्यवस्था को सशक्त बनाने का दिया संदेश
बीकानेर। राजकुमार किराडू ने बताया की भारतीय संविधान के 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को प्राप्त संवैधानिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं शक्तियों की जानकारी आमजन तक पहुँचाने के उद्देश्य से तैयार किए गए विशेष जन-जागरूकता पोस्टर ‘गाँव का अधिकार – गाँव की सरकार’ का विमोचन संसद सेवा केंद्र में श्री रविशेखर मेघवाल द्वारा किया गया।
इस अवसर पर हर्षवर्धन जोशी, नवीन बिश्नोई एवं गंगाबिशन बिश्नोई भी उपस्थित रहे।
पोस्टर में पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 243 से 243-O तक के प्रमुख प्रावधानों, ग्राम सभा की भूमिका, ग्राम पंचायतों के अधिकारों तथा 11वीं अनुसूची में शामिल 29 विषयों की जानकारी सरल एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत की गई है।
इसके साथ ही पंचायती राज संस्थाओं को पर्याप्त वित्तीय संसाधन, स्पष्ट कार्य एवं अधिकार तथा आवश्यक प्रशासनिक कर्मचारी उपलब्ध करवाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया है।
इस अवसर पर रविशेखर मेघवाल ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती गाँवों के सशक्त होने से ही संभव है। जब ग्राम पंचायतों को उनके संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप पर्याप्त संसाधन एवं निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलेगी, तभी ग्रामीण विकास को नई दिशा मिल सकेगी।
उन्होंने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था के संवैधानिक प्रावधानों की जानकारी प्रत्येक जनप्रतिनिधि एवं आम नागरिक तक पहुँचना आवश्यक है, ताकि ग्राम सभाएँ अधिक सक्रिय हों और स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
पोस्टर के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि पंचायतों को केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित न रखकर वास्तविक स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं के रूप में सशक्त किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने इस जन-जागरूकता पहल की सराहना करते हुए कहा कि संविधान में प्रदत्त अधिकारों के प्रति जागरूकता ही मजबूत पंचायती राज व्यवस्था की आधारशिला है।
‘सशक्त ग्राम सभा – सशक्त पंचायत – सशक्त लोकतंत्र’
गाँव का विकास तभी होगा सार्थक, जब पंचायतों को मिलेंगे पूरे अधिकार, पर्याप्त संसाधन और निर्णय लेने की वास्तविक शक्ति।

BC

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