श्री जगन्नाथ यात्रा समारोह-2026 के तहत हुआ भव्य आयोजन, अन्न संरक्षण का दिया संदेश
खुलासा न्यूज,बीकानेर। देवस्थान विभाग एवं जगन्नाथ यात्रा समिति के संयुक्त तत्वावधान में श्री जगन्नाथ यात्रा समारोह-2026 के अंतर्गत आयोजित इको-फ्रेंडली धान रंगोली एवं काव्य वाचन कार्यक्रम श्रद्धा, साहित्य, लोककला और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम बन गया। कार्यक्रम में भगवान श्री जगन्नाथ की महिमा, अन्न के महत्व तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को काव्य और कला के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम देवस्थान विभाग की निरीक्षक सोनिया रंगा, मैनेजर राजेश दाधीच एवं जगन्नाथ यात्रा समिति के अध्यक्ष गणेश पांडे के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इन्द्रा व्यास, विशिष्ट अतिथि कृष्णा आचार्य तथा अध्यक्षता डॉ. हरिदास हर्ष ने की। संचालन कैलाश टाक तथा संयोजन एवं समन्वयन ज्योति स्वामी ने किया।
मुख्य अतिथि इन्द्रा व्यास ने भगवान श्री जगन्नाथ की महिमा का भावपूर्ण काव्य पाठ किया। विशिष्ट अतिथि कृष्णा आचार्य ने धान और अन्न की महत्ता पर आधारित रचना प्रस्तुत करते हुए अन्न संरक्षण का संदेश दिया। अध्यक्ष डॉ. हरिदास हर्ष ने अपनी प्रार्थनामयी रचना के माध्यम से आत्मचिंतन एवं सदाचार का संदेश दिया।
कार्यक्रम में कवि जुगल किशोर पुरोहित, रामेश्वर साधक, शिव प्रकाश दाधीच, कृष्णा जोशी, राजाराम स्वर्णकार, विनीता शर्मा तथा ज्योति स्वामी सहित अनेक कवियों एवं कवयित्रियों ने भगवान श्री जगन्नाथ, अन्नदान, भारतीय संस्कृति, भाईचारे और मानवीय मूल्यों पर आधारित रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। संयोजक कैलाश टाक ने भी अन्नदान और सेवा की भावना पर आधारित अपनी रचना प्रस्तुत कर सभी को प्रेरित किया।
इस अवसर पर आयोजित इको-फ्रेंडली धान रंगोली प्रतियोगिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही। प्रतियोगिता में कलाकारों ने विभिन्न प्रकार के धान एवं अनाजों से भगवान श्री जगन्नाथ, अन्न की महिमा, भारतीय संस्कृति तथा पर्यावरण संरक्षण विषयों पर आकर्षक एवं संदेशपरक रंगोलियां बनाई। चंद्रकला सोनी, दमयंती सुथार, संगम, खुशी सोनी, सुमित्रा सेन, प्रीति सोनी, हर्षिता ओझा, बबीता शर्मा, निकिता, जसोदा खत्री, अक्षिता जोशी, चित्रा बिस्सा, माही सोनी, महेश पुरोहित, पूजा सोनी, निकिता सोनी, नीलम एवं सुनीता सहित सभी प्रतिभागियों की कलात्मक प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह की सराहना प्राप्त की।
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों, कवियों, कवयित्रियों एवं रंगोली कलाकारों का सम्मान किया गया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि अन्न केवल भोजन नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति, सेवा और श्रद्धा का प्रतीक है। साहित्य, लोककला और पर्यावरण संरक्षण का यह सुंदर समन्वय उपस्थित सभी लोगों के लिए यादगार बन गया।
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