गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति ने मनाया स्थापना के 30 वर्ष पूर्ण होने का उत्सव
गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति ने मनाया स्थापना के 30 वर्ष पूर्ण होने का उत्सव
ऋषिकेश, 3 जून। गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति, भारत की स्थापना के 30 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में बुधवार को ऋषिकेश स्थित गीता भवन के गंगा तट पर उत्साहपूर्वक स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देशभर से जुड़े पदाधिकारियों, साधकों एवं समाजसेवियों ने भाग लिया।
समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम किशोर तिवाड़ी (बीकानेर) ने अपने संबोधन में बताया कि 3 जून 1996 को गीता भवन परिसर में पूज्य स्वामी रामसुखदास जी महाराज की आज्ञा एवं सानिध्य में भ्रूण हत्या के विरुद्ध जनजागरण तथा सनातन संस्कृति एवं संस्कारों के संवर्धन के उद्देश्य से समिति की स्थापना की गई थी।
उन्होंने कहा कि पिछले 30 वर्षों से समिति देशभर में सेमिनार, सम्मेलन, रैलियां एवं साहित्य वितरण के माध्यम से व्यापक जनजागरण अभियान चला रही है। तिवाड़ी ने बताया कि संस्था ने स्वामी जी की प्रेरणा और सिद्धांतों का पालन करते हुए बिना किसी चंदे या अनुदान के अब तक 65 से अधिक राष्ट्रीय एवं प्रांतीय सम्मेलन और रैलियों का आयोजन किया है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि गर्भपात संबंधी कानून को अधिक प्रभावी एवं कठोर बनाने तथा आवश्यक संशोधनों की मांग को लेकर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में संस्था की जनहित याचिका विचाराधीन है।
समारोह के दौरान समिति के वरिष्ठ साधक अजय कुमार तथा बीकानेर के समाजसेवी डॉ. महादेव शर्मा का शॉल, दुपट्टा एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय महामंत्री सरिता सरावगी (रायपुर), राजस्थान महिला प्रभारी कविता यादव, नोहर शाखा अध्यक्ष श्याम सुंदर मंत्री, भुवनेश यादव, चंद्रकला स्वामी, ममता पारीक, पंडित जय दयाल शर्मा एवं बबली बहिन सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
समारोह का समापन समिति के उद्देश्यों को जन-जन तक पहुंचाने और भ्रूण हत्या के विरुद्ध जागरूकता अभियान को और अधिक व्यापक बनाने के संकल्प के साथ हुआ।
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