पड़ौसी विवाद में हुई मारपीट के बाद 72 वर्षीय ब़ुजुर्ग की पीट-पीटकर उतार दिया था मौत के घाट, 4 जनों को उम्रकैद की सजा
पड़ौसी विवाद में हुई मारपीट के बाद 72 वर्षीय ब़ुजुर्ग की पीट-पीटकर उतार दिया था मौत के घाट, 4 जनों को उम्रकैद की सजा
बीकानेर। जिले की अपर सेशन न्यायालय संख्या-5 के न्यायाधीश मधु हिसारिया ने पड़ोसी विवाद में हुई मारपीट के बाद 72 वर्षीय जमालदीन की मौत के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों सन्नी कुमार, मंजू पत्नी बलदेव राम, सुमन पत्नी ओमप्रकाश और लक्ष्मी पत्नी प्रभात उर्फ लक्की को हत्या का दोषी ठहराया है। कोर्ट ने आरोपियों को आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं भरने पर प्रत्येक दोषी को छह माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
कोर्ट ने कहा कि आरोपियों द्वारा लाठी-डंडों से की गई मारपीट के दौरान लगी चोटों से जमालदीन की छोटी आंत फट गई थी। मेडिकल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट हुआ कि इसी चोट के कारण सेप्टिक शॉक हुआ, जिससे उनकी मौत हो गई।
क्या है मामला?
मामले के अनुसार, एक अगस्त 2021 को परिवादी मोहम्मद अली अपने पड़ोसी के दामाद ओमप्रकाश को बाइक से छोडऩे गया था। इसी दौरान पहले उसके साथ मारपीट की गई। बाद में जब वह अपने घर के बाहर खड़ा था, तब आरोपी सन्नी, मंजू, सुमन, लक्ष्मी और एक नाबालिग ने मिलकर उस पर हमला कर दिया। बेटे को बचाने पहुंचे उसके पिता जमालदीन के साथ भी लाठी-डंडों से बेरहमी से मारपीट की गई। घटना के बाद जमालदीन को पीबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई और कुछ दिन बाद उनकी मौत हो गई।
मेडिकल साक्ष्य पर कोर्ट का भरोसा
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रत्यक्षदर्शी गवाहों, मेडिकल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डॉक्टरों की गवाही पर भरोसा जताया। पोस्टमार्टम में सामने आया कि मृतक की छोटी आंत में छेद हो गया था और उसी के कारण हुए सेप्टिक शॉक से उनकी मृत्यु हुई।
बचाव पक्ष ने गवाहों के बयानों में विरोधाभास और पुरानी बीमारी का तर्क दिया, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि मेडिकल साक्ष्य और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं और यह संदेह से परे साबित होता है कि मारपीट में लगी चोटें ही मौत का कारण बनीं।
कोर्ट ने सुनाई ये सजा
कोर्ट ने प्रत्येक दोषी को आजीवन कारावास और 20,000 रुपये जुर्माना और जुर्माना नहीं देने पर छह माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना पड़ेगा। कोर्ट ने मृतक के आश्रितों को पीडि़त प्रतिकर दिलाने के लिए निर्णय की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बीकानेर को भेजने के भी निर्देश दिए हैं। राज्य की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजक शिवशंकर स्वामी ने की।
Join for Latest News
हमारे चैनल से जुड़ें और सभी अपडेट सबसे पहले पाएँ