पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर अहम बैठक, वन स्टेट- वन इलेक्शन के तहत चुनाव करवाने पर सहमति, पढ़ें खबर
खुलासा न्यूज,बीकानेर। शुक्रवार को केबिनेट और मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित की गयी। सीएम भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में यह बैठक आयोजित की गयी। जिसमें विभिन्न मुद्दों को लेेकर मंथन हुआ। सरकारी कर्मचारियों, मजदूरों और पंचायत-निकाय चुनाव से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक के बाद डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा, कानून मंत्री जोगाराम पटेल और उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने फैसलों की जानकारी दी।
कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया- कैबिनेट ने ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट का अनुमोदन किया। सरकार शुरू से ही वन स्टेट वन इलेक्शन की अवधारणा के पक्ष में रही है। हमने बजट में भी इसकी घोषणा की थी। कैबिनेट ने एक बार फिर इसी अवधारणा को दोहराया। उसी के अनुरूप हम इस साल पंचायत और निकाय चुनाव एक साथ करने जा रहे हैं।
कैबिनट ने राज्य मजदूरी संहिता 2026 को मंजूरी दी है। इसमें मजदूर का वेतन तय करने के लिए वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जाएगी। साल में 2 बार (1 अप्रैल और 1 अक्टूबर को) वेतन में बढ़ोतरी की जाएगी। इसके साथ ही कर्मचारियों को सैलरी स्लिप देना भी अनिवार्य होगा। पटेल ने बताया- मजदूर से सप्ताह में 48 घंटे ही काम लिया जा सकेगा। 5 घंटे के काम के बाद आधे घंटे आराम देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों को अब राज्य बीमा का लाभ सेवानिवृत्ति की अंतिम तारीख तक मिलेगा। अभी तक सेवानिवृत्ति के साल में 1 अप्रैल तक ही यह लाभ मिलता था।
उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने बताया- मंत्रिमंडल ने प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सुरक्षा, आजीविका संवर्धन और विकास की दिशा में विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी विकसित भारत-जी.आर.ए.एम. योजना शुरू करने की स्वीकृति दी है।
यह योजना विकसित भारत और विकसित राजस्थान के विजन 2047 के अनुरूप ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर, समावेशी और दीर्घकालिक रूप प्रदान करेगी। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के बेहतर अवसर तो उपलब्ध होंगे ही, साथ ही जल संरक्षण, बुनियादी ढांचा (अवसंरचना) निर्माण और आपदा प्रबंधन के कार्य भी करवाए जा सकेंगे।
इस योजना के तहत ग्रामीण परिवारों की रोजगार सुरक्षा को बढ़ाते हुए एक वित्तीय साल में 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी दी गई है। योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही, महिलाओं और कमजोर वर्गों की भागीदारी को भी विशेष रूप से प्रोत्साहित किया गया।
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