बडी खबर: बीकानेर में कांग्रेस का मेयर बनना लगभग तय! अचानक बदल गई सियासी गणित?
बडी खबर: बीकानेर में कांग्रेस का मेयर बनना लगभग तय! अचानक बदल गई सियासी गणित?
बीकानेर। राजस्थान के बीकानेर नगर निगम में सत्ता की बाजी पूरी तरह से पलट चुकी है। निकाय चुनाव के आधिकारिक नतीजों में 80 वार्डों वाली निगम में कांग्रेस ने 42 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि भाजपा को केवल 27 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा है। इस बीच नामांकन वापसी के आखिरी दिन कांग्रेस के वरिष्ठ बागी नेता नवरत्न डागा ने निर्दलीय के रूप में अपना पर्चा वापस ले लिया है, जिससे अब बीकानेर में कांग्रेस का नया महापौर बनना पूरी तरह से तय माना जा रहा है। गौरतलब है कि कांग्रेस ने वार्ड 73 से निर्वाचित अनिल कल्ला को महापौर पद का अधिकृत प्रत्याशी बनाया है, जबकि भाजपा ने भी मुकाबले को एकतरफा नहीं छोड़ते हुए वार्ड 13 के पार्षद सुरेंद्र सिंह शेखावत को मैदान में उतारा है।
महज ढाई साल पहले बीकानेर पश्चिम विधानसभा सीट पर बड़ी जीत दर्ज करने वाली भाजपा के लिए यह परिणाम एक बड़ा झटका है, क्योंकि केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल और दिग्गज नेताओं के प्रभाव वाले गंगाशहर जैसे पारंपरिक गढ़ में भाजपा 16 में से केवल 2 सीटों पर सिमट कर रह गई है।
बीकानेर महापौर पद की रेस में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके अपने ही बागी नेता नवरत्न डागा बने हुए थे। निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर पर्चा दाखिल करने के बाद माना जा रहा था कि वे कांग्रेस के खेल को बिगाड़ सकते हैं। हालांकि, नामांकन वापसी के अंतिम दिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की समझाइश के बाद नवरत्न डागा ने अपना नामांकन वापस ले लिया। उनके इस फैसले के बाद अब कांग्रेस खेमे में खुशी की लहर है और पार्टी का बोर्ड बनना लगभग सुनिश्चित हो चुका है।
बदला बीकानेर का सियासी गणित
विधानसभा चुनाव 2023-24 के दौरान भाजपा के जेठानन्द व्यास ने बीकानेर पश्चिम से कांग्रेस के दिग्गज नेता डॉ. बुलाकीदास कल्ला को 20 हजार से अधिक वोटों से हराया था। लेकिन ढाई साल के भीतर ही हुए इन निकाय चुनावों ने पूरे शहर का मिजाज बदल दिया।
बीकानेर पश्चिम के 39 वार्डों में से 23 पर भाजपा प्रत्याशियों को हार का मुंह देखना पड़ा है। यह बदलाव शहर में भाजपा के स्थानीय नेतृत्व, टिकट वितरण प्रणाली और पिछले बोर्ड के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कांग्रेस के पास बहुमत, फिर भी चुनौती!
बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों में कांग्रेस ने 42 सीटें जीती हैं। भाजपा के खाते में 27 वार्ड आए, जबकि 10 निर्दलीय और एक वार्ड में आरएलपी प्रत्याशी विजयी हुआ। ऐसे में कांग्रेस के पास महापौर चुनाव के लिए बहुमत से अधिक पार्षद हैं।
भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ में बड़ी हार
गंगाशहर क्षेत्र लंबे समय से भाजपा का अजेय किला माना जाता रहा है। पूर्व महापौर नारायण चोपड़ा, पूर्व ढ्ढञ्ज अध्यक्ष महावीर रांका, शहर अध्यक्ष सुमन छाजेड़ और केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल जैसे दिग्गज नेताओं का यह मुख्य क्षेत्र है। इसके बावजूद गंगाशहर के 16 वार्डों में से भाजपा केवल 2 वार्ड (वार्ड 3 और वार्ड 6) में ही जीत पाई। केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल के खुद के मतदाता वाले वार्ड 6 में भी भाजपा प्रत्याशी महज 32 वोट के बेहद मामूली अंतर से ही जीत दर्ज कर सके।
नेताओं के इलाकों में नहीं चला प्रभाव
इस चुनाव में भाजपा के कई बड़े नेताओं की साख को सीधा धक्का लगा है। पार्टी के महामंत्री मोहन सुराणा अपनी खुद की पत्नी को चुनाव नहीं जिता पाए, वहीं शहर भाजपा अध्यक्ष सुमन छाजेड़ की करीबी प्रत्याशी भी हार गईं। बीकानेर के 80 वार्डों के अंतिम आंकड़े देखें तो कांग्रेस 42, भाजपा 27, निर्दलीय 10 और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (क्ररुक्क) 1 सीट पर सिमट गई है।
21 सितंबर को मिलेगा नया मेयर
बीकानेर नगर निगम में महापौर चुनाव की तारीख 21 सितंबर तय की गई है। प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां जोरों पर हैं और निगम मुख्यालय में महापौर के मुख्य कक्ष की सफाई और सजावट का काम शुरू कर दिया गया है। एक तरफ जहां भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारीलाल बिश्नोई हार के कारणों की समीक्षा की बात कह रहे हैं, वहीं कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ अपने नए मेयर की ताजपोशी की तैयारी कर रही है।
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