युवक के साथ बस में मारपीट कर चलती बस से नीचे फेंका, हुई मौत के मामले में परिजनों ने मोर्चरी के बाहर लगाया धरना
युवक के साथ बस में मारपीट कर चलती बस से नीचे फेंका, हुई मौत के मामले में परिजनों ने मोर्चरी के बाहर लगाया धरना
बीकानेर। जिले के श्रीडूंगरगढ़ थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां बस में मारपीट के बाद एक व्यक्ति को चलती बस से नीचे फेंक दिया गया। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति ने तीन दिन तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष किया, लेकिन आखिरकार पीबीएम अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
मृतक की पहचान आड़सर निवासी हड़मानाराम नायक के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह अपनी बेटी को लेने आड़सर से गुसाईसर जा रहा था। इसी दौरान बस में कुछ लोगों के साथ विवाद हो गया, जिसके बाद आरोप है कि बस के कंडक्टर, ड्राइवर और दो-तीन अन्य लोगों ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की और चलती बस से नीचे फेंक दिया। घटना के बाद गंभीर हालत में हड़मानाराम को पीबीएम अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां वह तीन दिन तक जिंदगी के लिए जूझता रहा, लेकिन अंतत: उसकी मौत हो गई।
मोर्चरी के बाहर धरना, न्याय की मांग तेज
हड़मानाराम की मौत के बाद परिजनों और समाज के लोगों में भारी आक्रोश है। पीबीएम अस्पताल की मोर्चरी के बाहर धरना शुरू कर दिया गया है। धरने पर बैठे लोगों ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं।
ये मांगे रखी
मृतक परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा
परिवार के एक सदस्य को संविदा पर सरकारी नौकरी
नामजद आरोपियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर चालान पेश किया जाए
मामले के जांच अधिकारी पवन शर्मा को सस्पेंड किया जाए
एसआईटी गठित कर उच्च स्तर पर जांच करवाई जाए
संबंधित बस का रूट निरस्त कर बस को सीज किया जाए
न्याय मिलने तक नहीं हटेंगे, चाहे कुछ भी हो जाए
धरने पर बैठे मनीष नायक ने साफ कहा कि जब तक प्रशासन उनकी मांगें नहीं मानता, तब तक न तो पोस्टमॉर्टम करवाया जाएगा और न ही धरना समाप्त होगा। उन्होंने कहा, कि न्याय में चाहे 15 दिन लग जाए या एक महीना, हम अपने परिवार को न्याय दिलाकर ही यहां से उठेंगे।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मृतक हड़मानाराम नायक अपने पीछे बड़ा परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिवार में पांच बेटियां और एक बेटा है। उनकी मौत से परिवार पर गहरा आर्थिक और सामाजिक संकट आ खड़ा हुआ है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है, लेकिन परिजनों का गुस्सा और धरना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
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