ईरान पर अमेरिका का फिर बड़ा हमला, कई सैन्य ठिकाने तबाह; मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर
ईरान पर अमेरिका का फिर बड़ा हमला, कई सैन्य ठिकाने तबाह; मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर
अमेरिका ने गुरुवार सुबह ईरान पर एक और बड़े सैन्य अभियान को अंजाम दिया। यह कार्रवाई जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरानी मिसाइल हमले की कोशिश के बाद की गई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि हमलों में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
CENTCOM के अनुसार, एयरस्ट्राइक में सैन्य कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन ठिकानों, तटीय रक्षा प्रणालियों तथा समुद्री सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिकी सैनिकों, अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और खाड़ी क्षेत्र के सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि यदि ईरान हमले जारी रखता है तो अमेरिका "बहुत जोरदार जवाब" देगा। ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान की ओर से दागी गई सभी मिसाइलों को अमेरिकी रक्षा प्रणाली ने सफलतापूर्वक रोक दिया था।
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ट्रम्प की कड़ी चेतावनी: राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो अमेरिका ईरान के खिलाफ और अधिक सख्त सैन्य कार्रवाई करेगा, हालांकि भविष्य में कूटनीतिक समाधान की संभावना से भी इनकार नहीं किया।
इराक में संयुक्त कार्रवाई: अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स (PMF) के ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले किए। PMF के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 20 लड़ाके मारे गए।
मिस्र के बंदरगाह पर ड्रोन हमला: मिस्र के दमियत्ता बंदरगाह पर अमेरिकी स्वामित्व वाले गैस स्टोरेज टैंकर पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे आग लग गई। हालांकि प्रशासन ने आग पर जल्द काबू पा लिया और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष और बढ़ा तो कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का दावा: ईरान ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री क्षेत्र पर उसका नियंत्रण है तथा उसकी अनुमति के बिना किसी जहाज की आवाजाही नहीं होगी। यह बयान वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताओं को जन्म दे रहा है।
अगर यह सैन्य तनाव जारी रहता है, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है।
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