अमेरिका-ईरान टकराव फिर गहराया, दूतावास और नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी
अमेरिका-ईरान टकराव फिर गहराया, दूतावास और नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी
नई दिल्ली। मिडिल-ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका ने क्षेत्र के कई देशों में मौजूद अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अमेरिकी विदेश विभाग ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति तेजी से बदल सकती है और उड़ानों में देरी, रद्दीकरण या एयरस्पेस बंद होने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कैंप डेविड का अपना दौरा निर्धारित समय से एक दिन पहले खत्म कर शनिवार शाम व्हाइट हाउस वापसी की। उनकी जल्दी वापसी की आधिकारिक वजह तत्काल स्पष्ट नहीं की गई है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच इस घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है।
9 देशों में अमेरिकी नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह
अमेरिका की ओर से इराक, बहरीन, ओमान, सऊदी अरब, ईरान, कतर, लेबनान, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी नागरिकों को ज्यादा सतर्क रहने की सलाह दी गई है। अमेरिकी अधिकारियों ने नागरिकों से स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का पालन करने और उड़ानों व एयरपोर्ट से जुड़ी ताजा जानकारी पर नजर रखने को कहा है।
ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं 7 शर्तें
तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए 7 शर्तें रखे जाने की बात कही है। ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजई के अनुसार, कतर के माध्यम से ये शर्तें अमेरिका तक पहुंचाई गई हैं और अब तेहरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के जवाब का इंतजार कर रहा है।
रेजई ने सार्वजनिक रूप से तीन प्रमुख मांगों का उल्लेख किया है—सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना, विदेशों में फ्रीज किए गए ईरानी फंड जारी करना और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना। उन्होंने यह भी कहा कि मांगें स्वीकार नहीं होने की स्थिति में ईरान युद्ध जारी रखने के लिए तैयार है।
सैन्य गतिविधियों पर भी नजर
इस बीच क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को लेकर भी रिपोर्टें सामने आ रही हैं। हालांकि, अलग-अलग स्रोतों से सामने आई कुछ सैन्य गतिविधियों की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है। इसलिए इन दावों को फिलहाल संबंधित रिपोर्टों के संदर्भ में ही देखा जा रहा है।
मध्य-पूर्व में एक तरफ कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य तनाव और क्षेत्रीय हमलों के कारण स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।
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