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कुछ वार्ड ऐसे जहां कई चुनावों से जमीनी कार्यकर्ताओं की बजाय केवल एक ही चेहरे पर बार-बार दांव

Bansal sadi
5 hours ago
कुछ वार्ड ऐसे जहां कई चुनावों से जमीनी कार्यकर्ताओं की बजाय केवल एक ही चेहरे पर बार-बार दांव

दोनों ही पार्टियों में विरोध, क्या अभी भी परिवारवाद से ऊपर नही उठ पाए?

खुलासा खास खबर
-कुशाल सिंह मेड़तिया, संपादक

बीकानेर. नगर निगम चुनावों को लेकर नामांकन की प्रक्रिया 31 अगस्त तक चलेगी। लेकिन भाजपा और कांग्रेस अंतिम दिन तक भी अपने-अपने प्रत्याशियों की सूची को जारी नही कर सकी है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह विरोध है। हालांकि संभावित सूची और फोन के आधार पर ही सामने आए नामों को लेकर वार्डों में विरोध के स्वर तेज हो गए है। इन सबके बीच एक बड़ा सवाल भी कई वार्डों में सामने आया है। कुछ वार्डों में एक बार फिर आखिर क्या दोनों ही पार्टियों में जमीनी कार्यकर्ताओं की बजाय वहीं पुराने नामों को सामने लाया गया है। एक तरफ जहां युवाओं की बात की का रही है वहीं दूसरी तरफ पुराने नेता जो चुनाव लड़ चुके है कई बार पार्षद बन चुके फिर से पार्टिया उन पर दांव लगा रही है। अगर ऐसी ही स्थिति रही तो आखिर युवा आगे कैसे आएंगे।

कब आएंगे नए कार्यकर्ता आगे
पार्षद चुनाव एक ऐसी प्रक्रिया है जब छोटे कार्यकर्ताओं को बड़ी उम्मीद रहती है। लेकिन बीकानेर नगर निगम चुनाव इसके उलट है। कुछ वार्डों को छोड़ दिया जाए तो अन्य वार्डों में 15-20 साल से चाहे एक परिवार हो या फिर एक ही चेहरे को मौका दिया जा रहा है। खास बात ये है कि पिछले चुनावों में हार का सामना करने के बावजूद भी पार्टियों की ओर से दोबारा मौका दिया जा रहा है। इस बार के चुनाव की बात करे तो जहां छोटे कार्यकर्ता जो पांच साल तक पार्टियों के काम में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते है। उनको बड़े नेताओं के नाम सामने आने बाद में साइड कर दिया गया गया है। इसका मतलब ये है कि चाहे लोकसभा, विधानसभा या निकाय चुनाव हो जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका मिलना मुश्किल ही नजर आता है।

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