"बीकानेर में महंतश्री गोस्वामी और देवश्री चांडक की ऐतिहासिक भेंट से जागी आत्मनिर्भर गौशालाओं की नई आशा”
गौ सेवा ही जीवन का संकल्प
"बीकानेर में महंतश्री गोस्वामी और देवश्री चांडक की ऐतिहासिक भेंट से जागी आत्मनिर्भर गौशालाओं की नई आशा”
बीकानेर। गौ सेवा, संरक्षण और गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण बैठक का बीकानेर में आयोजन किया गया, जिसमें महंत दीपक वल्लभ गोस्वामी एवं देव किशन चांडक (देवश्री) के बीच सार्थक चर्चा हुई। इस अवसर पर बीकानेर के जाने-माने उद्घोषक रविन्द्र हर्ष भी उपस्थित रहे।
बैठक में गौ सेवा को आधुनिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने, गौशालाओं में गायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा युवाओं को इस पुनीत कार्य से जोड़कर रोजगार के अवसर विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। विशेष रूप से गाय के शुद्ध दूध, घी, छाछ एवं गौमूत्र आधारित उत्पादों के माध्यम से गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने और आधुनिकीकरण की दिशा में ठोस योजनाओं पर चर्चा हुई।
इस अवसर पर महंत श्री गोस्वामी ने देवश्री देव किशन चांडक के गौ सेवा में अतुलनीय योगदान की सराहना करते हुए उन्हें “वासुदेव श्री कृष्ण” पुस्तक भेंट की तथा ठाकुर जी का इकलाई दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मानित किया और आशीर्वाद प्रदान किया।
महंत श्री गोस्वामी ने अपने उद्बोधन में कहा कि "देवश्री जैसे समर्पित गौ भक्त यदि हर शहर और गांव में हों, तो गौ माता की सच्ची सेवा संभव हो सकती है।"
वहीं देवश्री देव किशन चांडक ने भावुक शब्दों में संकल्प व्यक्त करते हुए कहा कि "जब तक जीवन है, तन-मन-धन से गौ माता की सेवा संतों महंतों के लिए सदैव समर्पित रहूंगा।"
इस दौरान जाने माने उद्घोषक रविन्द्र हर्ष ने भी गौ माता के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा : "गौ माता केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था का आधार हैं। यदि हम युवा पीढ़ी को गौ सेवा से जोड़ दें, तो यह केवल सेवा नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का माध्यम बन सकता है।"
इस कार्यक्रम के माध्यम से गौ सेवा के क्षेत्र में नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करते हुए समाज में जागरूकता का सकारात्मक संदेश दिया।
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