बीकानेर: तेज आंधी-बारिश में स्कूल की छत गिरी, ग्रीष्मावकाश के चलते टला बड़ा हादसा
बीकानेर: तेज आंधी-बारिश में स्कूल की छत गिरी, ग्रीष्मावकाश के चलते टला बड़ा हादसा
बीकानेर। लूणकरणसर क्षेत्र के गारबदेसर गांव स्थित राजकीय सीनियर सेकेंडरी विद्यालय में बुधवार देर रात आए तेज आंधी-तूफान और बारिश के दौरान एक कमरे की छत भरभराकर गिर गई। हादसे में कमरे के अंदर रखा फर्नीचर भी क्षतिग्रस्त हो गया। राहत की बात यह रही कि स्कूलों में ग्रीष्मावकाश चल रहा है और घटना रात के समय हुई, जिससे बड़ा हादसा टल गया। जानकारी के अनुसार विद्यालय के एक बड़े हॉल की छत पर लगी कुल 60 पट्टियों में से करीब 17 पट्टियां गिर गईं। इसी हॉल में दसवीं कक्षा का संचालन होता है, जहां 40 से अधिक विद्यार्थी अध्ययन करते हैं।
सुबह सामने आई घटना
ग्रामीणों ने बताया कि रात करीब 11 बजे तेज आंधी और बारिश के दौरान स्कूल भवन के एक कमरे की छत अचानक गिर गई। गुरुवार सुबह जब ग्रामीण और विद्यालय से जुड़े लोग परिसर पहुंचे तो घटना का पता चला। इसके बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग को सूचना दी गई। छुट्टियों के कारण कमरे में विद्यालय का फर्नीचर रखा हुआ था, जो छत गिरने से टूटकर क्षतिग्रस्त हो गया।
क्षतिग्रस्त भवनों की सूची में नहीं था नाम
हैरानी की बात यह है कि झालावाड़ हादसे के बाद शिक्षा विभाग द्वारा कराए गए स्कूल भवनों के ऑडिट में इस विद्यालय को क्षतिग्रस्त भवनों की सूची में शामिल नहीं किया गया था। विभाग ने सभी विद्यालयों से भवनों की स्थिति संबंधी रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन गारबदेसर विद्यालय का नाम सूची में नहीं था। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) किसनदान चारण ने बताया कि क्षतिग्रस्त स्कूलों की सूची में इस विद्यालय का नाम नहीं था। मामले की जानकारी लेकर जांच की जा रही है।
भवन सुरक्षा पर उठे सवाल
छत गिरने की घटना के बाद सरकारी स्कूल भवनों की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। बरसात के मौसम से पहले भवनों की तकनीकी जांच और मरम्मत की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होती है। ऐसे में विद्यालय की छत गिरना भवन की जर्जर स्थिति और रखरखाव में संभावित लापरवाही की ओर इशारा कर रहा है।
जांच के लिए पहुंचे अधिकारी
मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी उमराव यादव ने बताया कि विद्यालय के एक कमरे की छत गिरने की सूचना मिलने के बाद कनिष्ठ अभियंता के साथ मौके का निरीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही घटना के कारणों और भवन की वास्तविक स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। घटना के बाद ग्रामीणों और अभिभावकों ने क्षेत्र के अन्य पुराने स्कूल भवनों की भी सुरक्षा जांच कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
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