राजस्थान में भर्तियों के लिए सीईटी का नियम बदला,अब निगेटिव मार्किंग भी की जाएगी
राजस्थान में भर्तियों के लिए सीईटी का नियम बदला,अब निगेटिव मार्किंग भी की जाएगी
जयपुर। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने समान पात्रता परीक्षा - 2026 की तैयारियां शुरू कर दी है। इस बार ष्टश्वञ्ज के नियमों और परीक्षा पैटर्न में बड़ा बदलाव किया जाएगा।इस बार सीईटी में नेगेटिव मार्किंग लागू की जाएगी। इसके साथ ही स्नातक स्तर की परीक्षा नवंबर 2026 और सीनियर सेकंडरी स्तर की परीक्षा दिसंबर 2026 में आयोजित होगी।इसे पास करने वाले युवाओं के लिए ही राज्य की लगभग 19 से 23 बड़ी भर्तियों का रास्ता खुलेगा। इनमें पटवारी, ग्राम विकास अधिकारी (ङ्कष्ठह्र), कनिष्ठ लेखाकार, एलडीसी, प्लाटून कमांडर, छात्रावास अधीक्षक और पुलिस कॉन्स्टेबल जैसी भर्तियां शामिल हैं।
दरअसल, सीईटी सर्टिफिकेट की वैधता सिर्फ 1 साल थी। इसे अब बढ़ाकर 3 साल कर दिया गया है। इससे 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को फायदा मिलेगा।
वहीं, पात्रता के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक लाना जरूरी रहेगा। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को इसमें 5 प्रतिशत की छूट मिलेगी।
जानिए- कब शुरू होंगे आवेदन
उन्होंने बताया किस्नातक स्तर के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया जून 2026 में शुरू होगी। आवेदन करीब एक महीने तक लिए जाएंगे और परीक्षा नवंबर 2026 में प्रस्तावित है।
वहीं, ष्टश्वञ्ज सीनियर सेकंडरी स्तर के आवेदन जुलाई में शुरू हो सकते हैं, जबकि परीक्षा दिसंबर 2026 में आयोजित होने की संभावना है।
सीईटी 2024 की वैधता खत्म हो चुकी
ष्टश्वञ्ज-2024 की वैधता फरवरी 2026 में खत्म हो चुकी है। इससे स्नातक स्तर के 8.78 लाख और सीनियर सेकंडरी स्तर के 9.17 लाख अभ्यर्थियों की पात्रता खत्म हो गई थी।
इसके बाद से नईसीईटी परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों में लगातार संशय बना हुआ था, जिसे अब बोर्ड ने साफ कर दिया है। बता दें कि राजस्थान में कई बड़ी भर्तियां फिलहाल ष्टश्वञ्ज पात्रता के बिना अटकी हुई हैं।
इनमें पटवारी एलडीसी, महिला पर्यवेक्षक, उपजेलर, छात्रावास अधीक्षक ग्रेड-द्वितीय और पुलिस कांस्टेबल जैसी भर्तियां शामिल हैं। ष्टश्वञ्ज-2026 आयोजित होने के बाद इन भर्ती प्रक्रियाओं में तेजी आने की उम्मीद है।
निगेटिव मार्किंग क्यों?
कर्मचारी चयन बोर्ड अध्यक्ष आलोक राज ने बताया- इस बार ष्टश्वञ्ज का स्तर पहले की तुलना में ज्यादा कठिन रखा जाएगा। कोशिश रहेगी कि लगभग 3 से 4 लाख अभ्यर्थी ही पात्र हों। इसके लिए निगेटिव मार्किंग लागू की जाएगी।
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