Khulasa Online
Breaking
• गैस सिलेंडर बुकिंग नियमों पर सरकार की सफाई, कोई नया बदलाव नहीं, पढ़े खबर • इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा का अंतिम संस्कार, अंगदान से 6 लोगों को मिला नया जीवन • पीएम मोदी बोले - ईरान जंग जारी रही तो गंभीर होंगे नतीजे, आने वाला समय देश की सबसे बड़ी परीक्षा लेगा, टीम इंडिया की तरह करना होगा काम • रेलवे ने टिकट कैंसिल करने के नियम किए सख्त, ये नियम किया खत्म, पढ़े पूरी खबर ... • हरीश राणा का निधन, 13 साल से थे कोमा में; इच्छामृत्यु के लिए सुप्रीम कोर्ट से मिली थी इजाजत • गैस सिलेंडर बुकिंग नियमों पर सरकार की सफाई, कोई नया बदलाव नहीं, पढ़े खबर • इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा का अंतिम संस्कार, अंगदान से 6 लोगों को मिला नया जीवन • पीएम मोदी बोले - ईरान जंग जारी रही तो गंभीर होंगे नतीजे, आने वाला समय देश की सबसे बड़ी परीक्षा लेगा, टीम इंडिया की तरह करना होगा काम • रेलवे ने टिकट कैंसिल करने के नियम किए सख्त, ये नियम किया खत्म, पढ़े पूरी खबर ... • हरीश राणा का निधन, 13 साल से थे कोमा में; इच्छामृत्यु के लिए सुप्रीम कोर्ट से मिली थी इजाजत
Arham School
sukhajan
jeevan raksha
Sambhav Hospital
Bansal Group

दरबार की अनुमति से सावा, बीकानेर स्टेट के कर्मचारियों को मिलता था अवकाश

1 month ago
दरबार की अनुमति से सावा, बीकानेर स्टेट के कर्मचारियों को मिलता था अवकाश

दरबार की अनुमति से सावा, बीकानेर स्टेट के कर्मचारियों को मिलता था अवकाश

बीकानेर। पहले चार साल बाद और अब दो साल के अंतराल पर आयोजित हो रहा पुष्करणा ब्राह्मण समाज का सामूहिक विवाह (सावा) न केवल एक सामाजिक आयोजन है, बल्कि बीकानेर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का सजीव प्रतीक भी है। रियासतकाल से ही पुष्करणा सावे को बीकानेर दरबार का संरक्षण और प्रोत्साहन प्राप्त रहा है। परंपरा के अनुसार सावा आयोजन की अनुमति पूर्व बीकानेर राज परिवार से ली जाती रही है, जो आज भी कायम है। ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि बीकानेर दरबार पुष्करणा सावे को इतनी महत्वपूर्ण सामाजिक घटना मानता था कि बीकानेर स्टेट में महकमा खास सहित अन्य विभागों में कार्यरत पुष्करणा समाज के कर्मचारियों को सावे के अवसर पर विशेष अवकाश प्रदान किया जाता था। 

इसका अनुमोदन तत्कालीन प्रधानमंत्री करते थे। जानकारों के अनुसार वर्ष 1945 के बीकानेर रियासत रिकॉर्ड से यह तथ्य सामने आता है कि पुष्करणा सावे के दौरान महकमा खास के 40 कर्मचारी, अन्य विभागों के 60 कर्मचारी, कुल 100 कर्मचारियों के अवकाश को दरबार द्वारा स्वीकृति दी गई थी। रियासतकालीन अभिलेखों में वर्ष 1945 में श्री पुष्करणा जातीय सम्मेलन की ओर से तत्कालीन प्रधानमंत्री को लिखा गया एक पत्र भी सुरक्षित है। यह पत्र माधव प्रसाद व्यास ने भेजा था, जिसमें सावे के दौरान होने वाले यज्ञोपवीत संस्कार, पाणिग्रहण (विवाह) संस्कार, बरी संस्कार के दिनों में पुष्करणा समाज के कर्मचारियों को अवकाश दिए जाने की मांग की गई थी।

BC

Join for Latest News

हमारे चैनल से जुड़ें और सभी अपडेट सबसे पहले पाएँ

Tags: #bikaner
Share: