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पंचायत-निकाय चुनाव से पहले OBC का पूरा गणित सामने, जाट सबसे आगे, देखें किसकी कितनी आबादी

6 hours ago
पंचायत-निकाय चुनाव से पहले OBC का पूरा गणित सामने, जाट सबसे आगे, देखें किसकी कितनी आबादी
पंचायत-निकाय चुनाव से पहले OBC का पूरा गणित सामने, जाट सबसे आगे, देखें किसकी कितनी आबादी
 
जयपुर।  जयपुर। राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों से पहले अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ी आयोग की रिपोर्ट चर्चा में है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार राज्य के OBC (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग ने प्रदेश में OBC वर्ग की जातिगत और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सर्वे कराया है। आयोग की रिपोर्ट में 92 जातियों को शामिल किया गया है और सर्वे के दौरान 74 लाख से अधिक परिवारों से जानकारी जुटाए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट मुख्यमंत्री तक पहुंच चुकी है और इसका सीधा संबंध आगामी पंचायत एवं निकाय चुनावों में OBC आरक्षण के निर्धारण से है। 
 
रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में ओबीसी की 92 जातियों (5 एमबीसी जातियों सहित) की कुल जनसंख्या 3.58 करोड़ है। ओबीसी में जनसंख्या के मामले में जाट पहले नंबर पर हैं। प्रदेश में जाट पॉपुलेशन 71.76 लाख बताई गई है। गुर्जर दूसरे, कुम्हार-कुमावत तीसरे, माली-सैनी चौथे, जांगिड़ पांचवें, यादव छठे और मेव सातवें नंबर पर हैं। आयोग ने 74 लाख से ज्यादा ओबीसी परिवारों का सर्वे कर ये आंकड़े जुटाए हैं। पंचायत-निकाय चुनाव से पहले ओबीसी आयोग ने अपने स्तर पर कराई इस गणना की रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है।
 
राजस्थान में जाट-गुर्जर सबसे ज्यादा, 55 प्रतिशत आबादी टॉप 7 जातियों में
ओबीसी की 3.58 करोड़ आबादी में से 1.97 करोड़ की आबादी 7 जातियों में हैं। ओबीसी की कुल जनसंख्या में 55.03 फीसदी हिस्सा टॉप 7 जातियों का है। जाट, गुर्जर, कुम्हार-कुमावत,माली-सैनी,जांगिड़,यादव और मेव ओबीसी की 55 फीसदी आबादी है। इसके बाद बची हुई 85 जातियों की आबादी 45 फीसदी है। राजस्थान में जाट 71.76 लाख, गुर्जर 32.68 लाख, कुम्हार-कुमावत 29.97 लाख, माली-सैनी 27.97 लाख, जांगिड़ 12.52 लाख, यादव 11.57 लाख और मेव जनसंख्या 10.84 लाख है।
 
ओबीसी आबादी में 52.23% पुरुष, 1000 पुरुषों पर 914 महिलाएं
ओबीसी की 3.58 करोड़ ​आबादी में पुरुष 1 करोड़ 87 लाख 50 हजार 94 यानी 52.23% और महिलाएं 1 करोड़ 71 लाख 05 हजार 82 महिलाएं यानी 47.76% हैं। ओबीसी का लिंगानुपात 914 है। यानी प्रति हजार पुरुषों पर 914 महिलाएं हैं।
 
सात बड़ी जातियों का राजनीति, नौकरी, बिजनेस पर वर्चस्व
ओबीसी के 3.92 लाख सरकारी कर्मचारी हैं। सरकारी कर्मचारियों में 78 फीसदी हिस्सा चार जातियों से हैं, जिनमें जाट, गुर्जर, सैनी और यादव शामिल हैं।
 
जाट, सैनी, कुमावत और जांगिड़ खुद के बिजनेस में आगे
स्वरोजगार में भी बड़ी संख्या वाली जातियों का वर्चस्व है। ओबीसी के 12.50 लाख लोग खुद का रोजगार करते हैं। स्वरोजगार में जाट, सैनी, कुमावत, जांगिड़ आगे हैं। स्वरोजगार में जाट 1.21 लाख, सैनी 1.15 लाख, कुम्हार- कुमावत 1.24 लाख हैं। जांगिड़, सुथार जाति के 85,114 सदस्य स्वरोजगार में हैं।
 
8.67 लाख लोग प्राइवेट सेक्टर में जॉब वाले
ओबीसी के 8.67 लाख लोग प्राइवेट सेक्टर में अलग अलग तरह का जॉब करते हैं, इनमें कॉर्पोरेट सेक्टर से लेकर रिटेल जैसे काम शामिल हैं। प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों में भी वही जातियां आगे हैं जो सरकारी नौकरी और स्वरोजगार में आगे हैं। प्राइवेट नौकरियों में जाट/जट सिख 82 हजार 157, कुम्हार-कुमावत 51 हजार 277, सैनी 49 हजार 91 और यादव 28 हजार 797 हैं।
 
ओबीसी के 31.50 लाख लोग मजदूर
ओबीसी की 92 जातियों में 31.50 लाख लोग मजदूरी करके जीवन यापन करते हैं। 20 जातियों में ही सबसे ज्यादा मजदूर हैं। कुम्हार कुमावत जाति से 3.32 लाख लोग मजदूर हैं। ओबीसी में मजदूरी के मामले में कुमावत पहले नंबर पर हैं, दूसरे नंबर पर 2.67 लाख मजदूर सैनी जाति के हैं। तीसरे स्थान पर 2.16 लाख मजदूरों के साथ जाट हैं। गुर्जर 1.80 लाख मजदूर हैं। रावत 1.25 लाख और जांगिड़ 1.15 लाख मजदूर हैं।
 
एमबीसी की गुर्जर सहित 5 जातियों को भी ओबीसी के साथ गिना
आयोग की रिपोर्ट में एमबीसी की गुर्जर सहित 5 जातियों को भी ओबीसी के साथ गिना गया है। इसमें गुर्जर, बंजारा/ बाल्दिया/ लबाना, गाड़िया लुहार, रेबारी /रायका / देवासी, गडरिया (गाडरी) को ओबीसी के साथ गिना गया है।
 
आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक कर सकती है सरकार
ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट को आने वाले दिनों में सरकार सार्वजनिक कर सकती है। पहले भी इस तरह की रिपोर्ट सरकार सार्वजनिक करती रही है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित विपक्षी दलों के नेता रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग उठा रहे हैं।

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