PoK में नरसंहार: मुनीर की सेना की मनमानी, अब तक 46 लोगों की मौत, 1100 गिरफ्तार
PoK में नरसंहार: मुनीर की सेना की मनमानी, अब तक 46 लोगों की मौत, 1100 गिरफ्तार
इस्लामाबाद/मुजफ्फराबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के कारण मुजफ्फराबाद, मीरपुर और रावलाकोट सहित कई क्षेत्रों में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। अब तक 46 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, चार दिनों में 1100 से ज्यादा लोगों की भी गिरफ्तारी हुई है।
PoK विधानसभा की 12 सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे। JAAC इन सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहा है। हाल ही में PoK सुप्रीम कोर्ट ने इन सीटों को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त बताते हुए इन्हें समाप्त करने की मांग खारिज कर दी थी, जिसके बाद विरोध प्रदर्शन और तेज हो गए। PoK प्रशासन ने JAAC को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया है। इसके बाद कई नेताओं के खिलाफ राजद्रोह और अन्य मामलों में कार्रवाई शुरू की गई है। सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है और कई क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित बताई जा रही हैं।
इससे प्रदर्शनकारियों का जोश कम नहीं हुआ है। उनमें नाराजगी और बढ़ गई है। JAAC के सदस्य धरने की तैयारी तेज कर रहे हैं। पाकिस्तानी आर्मी और सरकार ने पुंछ, मीरपुर और मुजफ्फराबाद में अतिरिक्त अर्धसैनिक बल तैनाती के आदेश दिए हैं। इनमें रेंजर्स और फ्रंटियर कॉन्स्टेबुलरी के जवान शामिल हैं। प्रशासन ने प्रदर्शन समर्थक जेएएसी नेताओं शौकत नवाज मीर, ख्वाजा मेहरान और अन्य पर राजद्रोह के केस दर्ज किए हैं। सरकार अर्धसैनिक बलों का खौफ दिखाकर आंदोलन कुचलने की कोशिश कर रही है। सरकार ने 5 जून को JAAC पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद से इलाके में तनाव लगातार बढ़ रहा है।
प्रदर्शनों और हड़तालों के कारण बाजार, स्कूल, कॉलेज और सरकारी कार्यालय प्रभावित हुए हैं। कई शहरों में सामान्य जनजीवन बाधित होने की खबरें हैं। स्थानीय लोगों ने खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को लेकर भी चिंता
PoK में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं, जिनमें 45 सीटों पर प्रत्यक्ष चुनाव होता है जबकि शेष सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं। आरक्षित शरणार्थी सीटों को लेकर ही वर्तमान विवाद केंद्रित है। स्थिति लगातार संवेदनशील बनी हुई है और आने वाले दिनों में प्रशासन तथा प्रदर्शनकारियों के रुख पर पूरे क्षेत्र की नजर बनी रहेगी।
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