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राजस्थान में गोवंश पर लम्पी का खतरा, गो सेवा आयोग ने जारी की एडवाइजरी

Bansal sadi
6 hours ago
राजस्थान में गोवंश पर लम्पी का खतरा, गो सेवा आयोग ने जारी की एडवाइजरी

राजस्थान में गोवंश पर लम्पी का खतरा, गो सेवा आयोग ने जारी की एडवाइजरी

जयपुर। भरतपुर, डीग, अलवर, धौलपुर और दौसा सहित पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में गोवंश में लम्पी स्किन डिजीज (लम्पी चर्म रोग) के मामले सामने आने के बाद संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। इसे देखते हुए राजस्थान गो सेवा आयोग ने प्रदेशभर के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए पशु चिकित्सा अधिकारियों और गोशाला संचालकों को बचाव के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं।

गो सेवा आयोग की सचिव डॉ. अनिता अग्रवाल के अनुसार लम्पी एक विषाणुजनित संक्रामक बीमारी है, जो गर्म और नमी वाले मौसम में मच्छर, मक्खी और चीचड़ के साथ-साथ दूषित पानी व चारे के जरिए तेजी से फैल सकती है। संक्रमित पशु को तेज बुखार आता है, त्वचा पर मोटी गांठें बन जाती हैं और पशु दाना-पानी छोड़कर कमजोर होने लगता है। दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन में भी भारी गिरावट देखी जाती है।

आयोग ने सलाह दी है कि लम्पी के लक्षण दिखाई देने पर बीमार पशु को तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग कर दिया जाए और उसे खुले में चरने के लिए न भेजें। संक्रमित पशु के बचे हुए चारे को नष्ट करने के साथ गोशाला में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है। गोबर नियमित रूप से हटाने, गोबर के ढेर पर ब्लीचिंग पाउडर डालने और शाम के समय नीम की पत्तियों का धुआं करने की सलाह दी गई है, ताकि मच्छर और मक्खियां दूर रहें।

इसके अलावा कच्चे फर्श पर चूना छिड़कने, पक्के फर्श की पोटेशियम परमैंग्नेट के घोल से सफाई करने और दीवारों पर चूने की पुताई कराने के निर्देश दिए गए हैं। बीमारी से मृत गोवंश को संक्रमण फैलने से रोकने के लिए करीब 1.5 मीटर गहरे गड्ढे में चूने या नमक के साथ दफनाने की सलाह दी गई है।

गो सेवा आयोग ने स्पष्ट किया है कि लम्पी वायरस जनित बीमारी है और इसका कोई सटीक इलाज नहीं है। ऐसे में समय पर पहचान, संक्रमित पशु को अलग रखना, साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव के उपाय ही गोवंश की सुरक्षा के सबसे प्रभावी तरीके हैं।

BC

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