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क्षत्रिय सभा ने मनाई महाराणा प्रताप की 486 वीं जयंती ।

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Yatra.com
2 weeks ago
क्षत्रिय सभा ने मनाई महाराणा प्रताप की 486 वीं जयंती ।

क्षत्रिय सभा ने मनाई महाराणा प्रताप की 486 वीं जयंती ।
भारतीय इतिहास में राजपूतों का गौरवपूर्ण स्थान रहा है,  यहां के रण बांकुरों ने देश, जाति, धर्म, तथा स्वाधीनता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने में कभी संकोच नहीं किया । उनके इतिहास पर संपूर्ण भारत को गर्व रहा है ,वीरों की इस भूमि में राजपूतों के छोटे बड़े अनेक राज्य रहे, जिन्होंने भारत की स्वाधीनता के लिए संघर्ष किया इन्हीं राज्यों में मेवाड़ का एक अपना विशिष्ट स्थान है । जिसमें इतिहास के गौरव बप्पा रावल, कुमार प्रथम महावीर हमीर, महाराणा कुंभा महाराणा सांगा, उदय सिंह और वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप ने जन्म लिया ।  मेवाड़ के महान राजपूत नरेश महाराणा प्रताप अपने पराक्रम और शौर्य के लिए पूरी दुनिया में मिसाल के तौर पर जाने जाते हैं । एक ऐसा ही राजपूत सम्राट जिसने जंगलों में रहना पसंद किया, लेकिन कभी विदेशी मुगलों की दासता स्वीकार नहीं कि यह उद्गार आज क्षत्रिय सभा एवं ट्रस्ट बीकानेर संभाग द्वारा आयोजित वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486 भी जयंती के अवसर पर अपने मुख्य अतिथि उद्बोधन में पवनवीर सिंह राठौड़, जनरल मैनेजर (ऑपरेशन) सी एम मूंधडा मेमोरियल हॉस्पिटल बीकानेर ने व्यक्त किये ।
मुख्य वक्ता के रूप में ओंकार सिंह मोरखाना, शिक्षाविद ने बताया कि भारत के इतिहास में महाराणा प्रताप का नाम साहस, शौर्य, त्याग एवं बलिदान के पर्याय के रूप में सदैव अत्यधिक प्रेरणा देने वाला रहा है मेवाड़ के सिसोदिया वंश में "महाराणा" का गौरव संबोधन केवल प्रताप सिंह को ही मिला ।  मुगल सम्राट अकबर के द्वारा दिए गए झूठे आश्वासन, भोग विलास, उच्च स्थान, पदाधिकार आदि प्रलोभनों के वशीभूत होकर कई राजपूत राजाओं ने उनका प्रभुत्व स्वीकार कर लिया था, और उसके आश्रित हो गए थे । सुखी जीवन की लालसा पूर्ति हेतु अनेक वीर राजपूत अपना गौरव को चुके थे ऐसा लगता था मानो राजस्थान ही नहीं अभी तो सारा भारत अपना आत्म गौरव को चुका है ऐसे विकट समय में मेवाड़ के महाराणा प्रताप का मातृभूमि की स्वतंत्रता की रक्षा हेतु पदार्पण हुआ । आज के युवा वर्ग को महाराणा के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए । 
समारोह के प्रारंभ में अतिथियों द्वारा महाराणा प्रताप के चित्र पर दीप प्रज्वलित,माल्यार्पण एवं पुष्प समर्पित कर उनको नमन किया गया एवं क्षत्रिय सभा के उपाध्यक्ष जगमाल सिंह पायली , मोहन सिंह नाल ने अतिथियों का माल्यार्पण कर उनका स्वागत किया । 
क्षत्रिय सभा एवं ट्रस्ट बीकानेर संभाग के प्रवक्ता प्रदीप सिंह चौहान ने बताया कि इस समारोह में सर्व समाज के विशिष्ट नागरिकों ने भाग लिया एवं यह निर्णय लिया कि प्रशासन से अनुरोध कर बीकानेर में महाराणा प्रताप की मूर्ति स्थापित करने का भी प्रयास किया जाएगा ।

Sanskar
BC

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