क्रेडिट कार्ड का 10.89 लाख रुपए का कर्ज नहीं चुकाया: कानूनी वारिसों के खिलाफ कोर्ट ने सुनाया फैसला
क्रेडिट कार्ड का 10.89 लाख रुपए का कर्ज नहीं चुकाया: कानूनी वारिसों के खिलाफ कोर्ट ने सुनाया फैसला
बीकानेर। वाणिज्यिक न्यायालय, न्यायाधीश ओम प्रकाश ने किसान क्रेडिट कार्ड ऋण से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मृतक के कानूनी वारिसों के खिलाफ 10 लाख 89 हजार 612 रुपए की डिक्री पारित की है। कोर्ट ने यह राशि बैंक को चुकाने के साथ-साथ 15 सितंबर 2025 से पूरी राशि की वसूली तक ऋण समझौते की शर्तों के अनुसार ब्याज अदा करने का भी आदेश दिया है।
मामला भारतीय स्टेट बैंक की ओर से प्रस्तुत किया गया था। वाद के अनुसार च्यानणमल जांगिड़ ने कृषि कार्यों की जरूरतों के लिए बैंक की किसान क्रेडिट कार्ड (्यष्टष्ट) ऋण योजना के तहत ऋण सुविधा के लिए आवेदन किया था। बैंक ने 28 सितंबर 2017 को अधिकतम 9 लाख 52 हजार 800 रुपए की ऋण सीमा स्वीकृत की थी।ऋण लेने के बाद च्यानणमल जांगिड़ की मृत्यु हो गई। उनके बाद मामले में नामजद लोग उनके कानूनी वारिस रहे। ऋण की राशि बैंक को वापस नहीं चुकाए जाने पर बैंक ने कानूनी वारिसों से 10,89,612 रुपए की वसूली के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत वाद दायर किया।समन के बावजूद कोर्ट में नहीं पहुंचे वारिस
कोर्ट ने बताया कि प्रतिवादियों को समन विधिवत तामील कराए गए थे। स्पीड पोस्ट की रसीद और ट्रैकिंग रिपोर्ट भी रिकॉर्ड पर पेश की गई। इसके बावजूद समन की तामील के बाद निर्धारित 10 दिन की अवधि में प्रतिवादी कोर्ट में उपस्थित होकर अपना पक्ष नहीं रख सके। कोर्ट ने कहा कि निर्धारित अवधि में प्रतिवादियों के उपस्थित नहीं होने पर वादपत्र में किए गए कथनों को स्वीकार किया हुआ माना जा सकता है।क के दस्तावेजों से ऋण लेना साबितकोर्ट ने बैंक की ओर से पेश किए गए बैंकिंग रिकॉर्ड और दस्तावेजों का अवलोकन किया। इनसे यह प्रमाणित हुआ कि मृतक च्यानणमल जांगिड़ ने बैंक से ऋण लिया था और अनुबंध के अनुसार ऋण की अदायगी नहीं की गई।कोर्ट ने माना कि मृतक के कानूनी वारिस होने के कारण प्रतिवादी ऋण की अदायगी के लिए विधि के अनुसार उत्तरदायी हैं। प्रतिवादियों की ओर से निर्धारित समय में उपस्थित होकर बचाव नहीं करने के कारण मामले में अन्य प्रक्रिया अपनाने की आवश्यकता नहीं रही।10.89 लाख की डिक्री, ब्याज भी देना होगावाणिज्यिक न्यायालय न्यायाधीश ओम प्रकाश ने आदेश में कहा कि वादी बैंक को प्रतिवादियों से 10,89,612 रुपए प्राप्त करने का अधिकार है। इसके साथ ही 15 सितंबर 2025 से उक्त राशि की पूरी वसूली तक ऋण लेन-देन की शर्तों के अनुसार ब्याज भी बैंक को मिलेगा। बैंक की ओर से पैरवी अधिवक्ता कपीश जैन ने की।
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