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खुलासा गेस्ट राइटर: पत्रकार मुकेश पूनिया की कलम से, सब खैरियत है...

Bansal
6 hours ago
खुलासा गेस्ट राइटर: पत्रकार मुकेश पूनिया की कलम से, सब खैरियत है...

खुलासा गेस्ट राइटर: पत्रकार मुकेश पूनिया की कलम से, सब खैरियत है...
 
एक ही दिन में फैल गया कांग्रेसी रायता 
बीकानेर मेयर के चुनावों में एकजुटता से दमदार प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस का रायता एक ही दिन में फेल गया और बहुमत होने के बावजूद डिप्टी मेयर की कुर्सी उसके हाथ से फिसल गई। दरअसल,डिप्टी मेयर की दावेदारी को लेकर कांग्रेसी खेमें में तगड़ी धमाचौकड़ी मची थी,पार्टी रणनीतिकारों ने भी धमाचौकड़ी को काबू करने के बजाए ढ़ील छोड़ दी। जिससे रायता फेल गया और बहुमत के बगैर ही भाजपा क्लिन स्विप कर गई। इससे भाजपा पर लगा मेयर चुनावों की हार का दाग भी थोड़ा हल्का हो गया। इसलिये फिलहाल सब खैरियत है।
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भाजपा पर लगा तानाशाही का दाग 
बीकानेर मेयर चुनावों की जंग में हद से ज्यादा आक्रामक मोड में रही भाजपा पर इस बार हार के साथ-साथ तानाशाही का दाग भी लग गया है। दरअसल, मेयर चुनावों की दिशा बदलने के लिए भाजपा ने जोड़-तोड़ के साथ-साथ खाकी फौज को भी अपने काम में लगा दिया। इसकेे बाद कांग्रेस के कई पार्षदों को रडार में लेकर शुरू हुई नोटिस पॉलिटिक्स खूब चर्चा में रही। लेकिन कांग्रेस ने बहुमत के दम पर भाजपा की सारी रणनीति फेल कर दी।  बहरहाल,मेयर की चेयर पर कांग्रेस की ताजपोशी हो चुकी है। लेकिन चुनाव में भाजपा की ओर से अपनाए गये ‘खतरनाक ट्रेंड’ को लोकतंत्र के घातक माना जा रहा है। जिससे पार्टी को बदनामी का दंश झेलना पर रहा है। मगर फिलहाल सब खैरियत है।
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कांग्रेस के लिये चमत्कारी साबित हुआ ‘पचास’! 
बीकानेर नगर निगम चुनावों में इस बार कांग्रेस के लिये ‘नंबर पचास’ खासा चमत्कारी रहा। दरअसल,वार्ड नंबर पचास की टिकट को लेकर पार्टी में बवडंर मचा और कांग्रेसी मदन जी वायरल हो गये। बाद में इसी वार्ड से जीते कांग्रेसी नवरत्न डागा ने मेयर चुनावों की जंग में पार्टी के खिलाफ बगावत का बिगुल बजाया था। सबसे बड़ा चमत्कार तो यह रहा कि ४२ का आकंडा होने के बावजूद पार्टी ने पचास के दम पर मेयर का चुनाव जीत लिय। ओर सुनो,कांग्रेस के देहात जी ने भी मेयर चुनावों के नामांकन वाले दिन ही मीडिया के सामने ‘पचास’ का आकंडा घोषित कर दिया था। इसके बावजूद भाजपाई महारथी अंधेरे में तीर चलाते रहे और कांग्रेस बाजी मार ले गई और भाजपा निपट गई है,मगर फिलहाल सब खैरियत है।
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भाजपाई चौकीदारों पर उठ रहे सवाल! 
चौकीदार भाजपा के लिये के लिये ‘ब्रांड’ नाम है,मगर बीकानेर में कमजोर रहे भाजपा के चौकीदारों ने पार्टी की लंका लुटवा दी। दरअसल,बीकानेर मेयर चुनाव की जंग में भाजपा ने अपने 27 पार्षदों और 8 निर्दलीयों मजबूत बाड़ाबंदी में ले रखा था। जिससे पार्टी उम्मीदवार को 35 वोट मिलने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन उसका आंकड़ा 30 पर सिमट कर रह गया और  कांग्रेस 50 वोट समेट ले गई। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि भाजपा बाड़ाबंदी में चौकीदारों की कमजोरी से कांग्रेस बड़ी सैंधमारी कर गई और भनक भी नहीं लगने दी।  मजे कि बात तो यह है कि भाजपा खेमें में चौकीदारी का जिम्मा नगर विधायक और पार्टी के चुनाव प्रभारी ने संभाल रखा था,फिर भी सैंधमारी हो गई। इसलिये चौकीदारों पर सवाल उठना लाजमी है। मगर फिलहाल सब खैरियत है।
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कप्तान की विदाई के लिये जप-तप ! 
निकाय चुनाव निपटने के बाद अब  पंचायत चुनावों की आहट के साथ जहां सियासतदार अपनी चौसर बिछाने में जुटे है,वहीं अफीम और डोडा-पोस्त तस्कर एक्टिव मोड़ में आ गये। दरअसल,पंचायत चुनावों को अफीम और डोडा-पोस्त तस्करी का तगड़ा सीजन माना जाता है। इस सीजन में करोड़ो का नशा खपाने के लिये तस्करों ने अपना नेटवर्क पूरा अपडेट कर रखा है। मगर खाकी फौज का ऑपरेशन नीलकंठ उनके लिये दुखदायी बना हुआ है। बड़ी बात तो यह है कि ऑपरेशन की कमान भी खुद कप्तान ने संभाल रखी है। ऐसे में तस्करी माफियाओं ने कप्तान की बीकानेर से विदाई के लिये जप-तप शुरू कर दिये है,मगर कप्तान तो खुद बड़े चमत्कारी है,इसलिये तस्करों की पार पड़ती मुश्किल नजर आ रही। खैर...फिलहाल सब खैरियत है।

BC

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