भक्तामर स्तोत्र अनुष्ठान का हुआ आयोजन, आध्यात्मिक ऊर्जा से अभिभूत हुए श्रावक-श्राविकाएं
भक्तामर स्तोत्र अनुष्ठान का हुआ आयोजन, आध्यात्मिक ऊर्जा से अभिभूत हुए श्रावक-श्राविकाएं
बीकानेर। रामपुरिया हवेलियों के पास स्थित तुलसी साधना केंद्र में शासनश्री साध्वीश्री मंजुप्रभा जी के सान्निध्य में भक्तामर स्त्रोत्र का सामुहिक रूप से अनुष्ठान करवाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत साध्वी मंजुप्रभाजी ने आादिनाथ भगवान की स्तुति से की। इस महान अनुष्ठान में अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लेकर आध्यात्मिक ऊर्जा से अपने आपको अभिभूत किया। साध्वीश्री ने लयबद्ध भक्तामर पाठ के साथ विशेष रिद्धि मंत्र, सिद्धि मंत्र का जप करवाकर सकारात्मक ऊर्जा सम्प्रेषित की। साध्वीश्री गुरुयशा जी ने भक्तामर स्तोत्र की महत्ता के बारे में बताते हुए कहा- भक्त और भगवान के तादात्मय भाव का नाम ही भक्ति है। भक्ति में अद्भूत शक्ति है। शक्ति प्राप्त करने के लिए के लिए भक्ति नहीं होती। शक्ति स्वत: प्रस्फुटित हो जाती है। इसकी महिमा अकथनीय है। भक्त को अभय बनाने का अपार सामर्थ्य भक्तामर पाठ में है। इसका प्रतिदिन पाठ करने से भीतर के रसायन बदल जाते हैं। शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक संकट समाप्त हो जाते है। प्रात:काल इस स्तोत्र का स्मरण करना चाहिए।
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