ईरान-इजरायल युद्ध के मिसाइल हमले में नागौर के युवक की मौत, एक महीने पहले जॉइन की थी मर्चेंट नेवी की नौकरी
ईरान-इजरायल युद्ध के मिसाइल हमले में नागौर के युवक की मौत, एक महीने पहले जॉइन की थी मर्चेंट नेवी की नौकरी
खुलासा ऑनलाइन। पश्चिमी एशिया में जारी ईरान-इजरायल युद्ध के बीच राजस्थान के नागौर जिले से दुखद खबर सामने आई है। ओमान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खासब पोर्ट के पास खड़े एक कमर्शियल जहाज ‘एमवी स्काईलाइट’ पर हुए भीषण मिसाइल हमले में नागौर के खींवताना गांव निवासी 24 वर्षीय दलीप सिंह की मौत हो गई। बुधवार सुबह शिपिंग कंपनी ने इस घटना की आधिकारिक पुष्टि की, जिसके बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
बताया जा रहा है कि दलीप सिंह ने इसी साल 22 जनवरी 2026 को मर्चेंट नेवी में अपनी ड्यूटी जॉइन की थी और वे एक ऑयल-केमिकल टैंकर पर क्रू मेंबर के रूप में तैनात थे। परिवार के अनुसार दलीप की अपनी मां से आखिरी बार 28 फरवरी को बात हुई थी, उस समय सब कुछ सामान्य था। लेकिन 1 मार्च की सुबह हुए मिसाइल हमले ने परिवार की खुशियां छीन लीं।
घटना 1 मार्च की सुबह की है, जब पलाऊ के झंडे वाला तेल टैंकर ‘एमवी स्काईलाइट’ ओमान के तट के पास खड़ा था। ओमान के मैरीटाइम सिक्योरिटी सेंटर के अनुसार जहाज पर ईरान की ओर से दागी गई मिसाइल या बारूद से भरी ड्रोन बोट से हमला हुआ। मिसाइल जहाज के अगले हिस्से पर गिरी, जहां उस समय दलीप सिंह ड्यूटी पर मौजूद थे। हमले के बाद जहाज में जोरदार विस्फोट हुआ और आग लग गई, जिससे जहाज बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
इस हमले में बिहार निवासी कैप्टन आशीष का शव बरामद कर लिया गया है, जबकि दलीप सिंह का शव अभी भी लापता बताया जा रहा है और उसकी तलाश जारी है। शिपिंग कंपनी के अनुसार हमले के समय जहाज पर 15 भारतीय और 5 ईरानी क्रू मेंबर सवार थे। राहत एवं बचाव अभियान के दौरान अधिकांश लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन तीन लोग लापता हो गए थे, जिनमें से दो की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
खासब पोर्ट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर स्थित है, जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण यह इलाका अब बेहद संवेदनशील बन गया है।
दलीप सिंह की मौत की खबर जैसे ही उनके गांव खींवताना पहुंची, पूरे गांव में शोक छा गया और परिवार में कोहराम मच गया। दलीप अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए विदेश गए थे और परिवार की बड़ी उम्मीद थे। ग्रामीणों और परिजनों ने भारत सरकार से मांग की है कि दलीप सिंह का शव जल्द भारत लाया जाए, युद्धग्रस्त क्षेत्र में फंसे अन्य भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक सहायता दी जाए।
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