मैत्री भावना से जीवन में सौहार्द एवं आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है – चित्तलेहांजनाश्रीजी म.सा.
मैत्री भावना से जीवन में सौहार्द एवं आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है – चित्तलेहांजनाश्रीजी म.सा.
बीकानेर। रांगनी चौक स्थित सुगनजी महाराज के उपाश्रय में विराजित पूज्य मुक्तांजना श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा के सान्निध्य में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचनों की श्रृंखला में सोमवार को धर्मसभा का आयोजन हुआ। इस अवसर पर परम पूज्य चित्तलेहांजनाश्रीजी महाराज साहब ने 14 भावनाओं में वर्णित मैत्री भावना का महत्व बताते हुए कहा कि सभी जीवों के प्रति मैत्री, करुणा एवं सद्भाव का भाव ही जीवन को शांति और आध्यात्मिक ऊंचाइयों की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि मैत्री भावना व्यक्ति के भीतर से द्वेष, ईर्ष्या एवं वैमनस्य को समाप्त कर आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।
धर्मसभा में पूज्य मुक्तांजनाश्रीजी महाराज साहब ने अमिचंद की अमी दृष्टि विषय पर प्रवचन देते हुए पारिवारिक जीवन में समरसता बनाए रखने का संदेश दिया। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि परिवार में नई परिस्थितियों के आगमन पर यदि धैर्य, त्याग एवं परस्पर सम्मान का भाव न हो तो वाद-विवाद बढ़ सकते हैं। इसलिए परिवार के प्रत्येक सदस्य को समझदारी एवं प्रेमपूर्वक व्यवहार करना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान “ॐ ह्रीं श्रीं अर्हम् नमः” जाप के कलश की स्थापना संपन्न हुई। कलश स्थापना का लाभ गुप्त रहा, जबकि वासक्षेप भरने का लाभ श्री हेमराजजी छाजेड़ परिवार ने प्राप्त किया। धर्मसभा में जोधपुर से पधारे श्री सुरेंद्रजी मूथा का संघ की ओर से बहुमान कर अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उपस्थित होकर प्रवचनों का लाभ प्राप्त किया।
बीकानेर। रांगनी चौक स्थित सुगनजी महाराज के उपाश्रय में विराजित पूज्य मुक्तांजना श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा के सान्निध्य में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचनों की श्रृंखला में सोमवार को धर्मसभा का आयोजन हुआ। इस अवसर पर परम पूज्य चित्तलेहांजनाश्रीजी महाराज साहब ने 14 भावनाओं में वर्णित मैत्री भावना का महत्व बताते हुए कहा कि सभी जीवों के प्रति मैत्री, करुणा एवं सद्भाव का भाव ही जीवन को शांति और आध्यात्मिक ऊंचाइयों की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि मैत्री भावना व्यक्ति के भीतर से द्वेष, ईर्ष्या एवं वैमनस्य को समाप्त कर आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।
धर्मसभा में पूज्य मुक्तांजनाश्रीजी महाराज साहब ने अमिचंद की अमी दृष्टि विषय पर प्रवचन देते हुए पारिवारिक जीवन में समरसता बनाए रखने का संदेश दिया। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि परिवार में नई परिस्थितियों के आगमन पर यदि धैर्य, त्याग एवं परस्पर सम्मान का भाव न हो तो वाद-विवाद बढ़ सकते हैं। इसलिए परिवार के प्रत्येक सदस्य को समझदारी एवं प्रेमपूर्वक व्यवहार करना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान “ॐ ह्रीं श्रीं अर्हम् नमः” जाप के कलश की स्थापना संपन्न हुई। कलश स्थापना का लाभ गुप्त रहा, जबकि वासक्षेप भरने का लाभ श्री हेमराजजी छाजेड़ परिवार ने प्राप्त किया। धर्मसभा में जोधपुर से पधारे श्री सुरेंद्रजी मूथा का संघ की ओर से बहुमान कर अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उपस्थित होकर प्रवचनों का लाभ प्राप्त किया।
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