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जिला स्तरीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में 172 खिलाड़ियों ने लिया भाग, 78 का राज्य स्तर के लिए चयन

Bansal
7 hours ago
जिला स्तरीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में 172 खिलाड़ियों ने लिया भाग, 78 का राज्य स्तर के लिए चयन
जिला स्तरीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में 172 खिलाड़ियों ने लिया भाग, 78 का राज्य स्तर के लिए चयन
 
बीकानेर। बीकानेर जिला ताइक्वांडो एसोसिएशन की ओर से आयोजित तीसरी जिला स्तरीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में 172 खिलाड़ियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खेल प्रतिभा का परिचय दिया। प्रतियोगिता के प्रदर्शन के आधार पर 78 खिलाड़ियों का आगामी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयन किया गया। श्री बीकानेर महिला मंडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित प्रतियोगिता में ओलिम्पिक मार्शल आर्ट्स एकेडमी ने प्रथम स्थान प्राप्त कर टीम ट्रॉफी जीती। अभिरुचि (आर्मी) ताइक्वांडो एकेडमी द्वितीय तथा कोबरा काई/स्काई हॉक एकेडमी तृतीय स्थान पर रही। जिला ताइक्वांडो एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राकेश हर्ष एवं उपाध्यक्ष विक्रम सिंह ने खिलाड़ियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बधाई दी।अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी रफीक खान का साफा पहनाकर स्वागत किया गया। सचिव राजेंद्र बुडानिया ने मंचासीन अतिथियों कर्नल अजीन जोस, मेजर धानवीर एवं कैप्टन हरीश यादव का साफा पहनाकर स्वागत किया। कोच अनूप चतुर्वेदी, जितेंद्र सिंह, अनिल बिशु, विशाल तेजी एवं राजेश प्रजापत ने अतिथियों का माल्यार्पण कर अभिनंदन किया। सचिव राजेंद्र बुडानिया ने कहा कि खिलाड़ियों ने खेल भावना का परिचय देते हुए शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि खेलों में सफलता खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत और प्रशिक्षकों के समर्पण का परिणाम है। प्रतियोगिता के पुरुष वर्ग में धनेश गहलोत तथा महिला वर्ग में कोमल कंवर को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी की ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में पदक विजेता खिलाड़ियों का चयन आगामी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए किया गया है।
 
प्रत्येक बच्चे की क्षमता को समझकर दें आगे बढ़ने का अवसर
‘प्रेरणा’ कार्यक्रम में समावेशन, सहयोग, सम्मान एवं सशक्तिकरण पर हुई सार्थक चर्चा
बीकानेर। अधिवक्ता संजय रंगा लाइफ फाउंडेशन संस्थान, बीकानेर की ओर से स्वर्गीय संजय रंगा की पुण्य स्मृति में ‘प्रेरणा’ कार्यक्रम का आयोजन धरणीधर ऑडिटोरियम में किया गया। कार्यक्रम में बच्चों एवं दिव्यांगजनों के समावेशन, उनकी क्षमताओं की पहचान, शिक्षा, स्वास्थ्य, अभिभावकों की भूमिका तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे।
संस्थान की अध्यक्ष एडवोकेट पारूल रंगा ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों की विभिन्न क्षमताओं को समझते हुए उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराने तथा अभिभावकों एवं शिक्षकों को उनकी जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चा अपनी अलग क्षमता और विशेषता रखता है। आवश्यकता इस बात की है कि उसकी रुचि और क्षमता को पहचानकर उसी अनुरूप उसे आगे बढ़ने के अवसर दिए जाएं।
कार्यक्रम में डॉ. हिमांशु भाटिया ने अपनी पुस्तक पर चर्चा करते हुए अभिभावकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों की योग्यता एवं क्षमता को समझना चाहिए तथा किसी भी प्रकार की समस्या दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय परामर्श एवं उपचार करवाना चाहिए। समय पर पहचान और उचित उपचार से बच्चों के विकास में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए परिवार और समाज दोनों की सक्रिय भूमिका आवश्यक है।
डॉ. भाटिया ने बच्चों की दैनिक दिनचर्या और उनके व्यवहार पर भी ध्यान देने की बात कही। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को मोबाइल और टीवी से दूर रखने का आग्रह करते हुए कहा कि बच्चों को एक समय में एक ही कार्य दिया जाना चाहिए। एक साथ कई काम या निर्देश देने से बच्चे पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है। इसलिए उनकी क्षमता और समझ के अनुसार गतिविधियां तय की जानी चाहिए। उन्होंने बच्चों को धैर्यपूर्वक समझने और उनकी छोटी-छोटी उपलब्धियों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
डॉ. पराज सिंघवी ने शिक्षा के दौरान बच्चों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों को एक साथ बहुत अधिक कार्य देने के बजाय उनकी क्षमता के अनुरूप अध्ययन करवाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों को प्रतिदिन एक पेज पढ़ने जैसी छोटी और सहज गतिविधियों से शुरुआत कराई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि पढ़ाई को बोझ बनाने के बजाय उसे सहज एवं रुचिकर बनाने की जरूरत है। लगातार पढ़ाई करवाने के बजाय बीच-बीच में बच्चों को ब्रेक देना चाहिए, ताकि वे आराम कर सकें और फिर बेहतर एकाग्रता के साथ पढ़ाई कर सकें। डॉ. सिंघवी ने अभिभावकों एवं शिक्षकों से बच्चों की व्यक्तिगत क्षमता और सीखने की गति को समझने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हर बच्चे की सीखने की क्षमता अलग होती है, इसलिए सभी बच्चों के लिए एक जैसी अपेक्षा रखना उचित नहीं है।
डॉ. श्याम अग्रवाल ने बच्चों की रुचि को उनकी सीखने की प्रक्रिया का आधार बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों पर अपनी पसंद थोपने के बजाय उनकी रुचि को पहचानना चाहिए। यदि बच्चा चित्र बनाना, कहानी सुनाना या खेलना पसंद करता है तो इन्हीं गतिविधियों के माध्यम से उसे सीखने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जब बच्चे को उसकी पसंद की गतिविधि से जोड़ा जाता है तो वह सहजता से उसमें रुचि लेने लगता है और सीखने की प्रक्रिया भी उसके लिए आनंददायक बन जाती है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की रुचियों को समझने तथा उनकी प्रतिभा को विकसित करने के लिए सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने की बात कही।
डॉ. अमित पुरोहित ने भी कार्यक्रम के उद्देश्य के अनुरूप बच्चों एवं दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशील और सहयोगात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान और आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। बच्चों की क्षमताओं को उनकी सीमाओं के बजाय उनकी संभावनाओं के दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि परिवार, शिक्षक और समाज मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करें, जिसमें बच्चे स्वयं को सुरक्षित, स्वीकार्य और सम्मानित महसूस करें। विशेष रूप से अलग-अलग क्षमताओं वाले बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहयोग उपलब्ध कराना उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
संस्थान के सचिव एडवोकेट राकेश रंगा ने कार्यक्रम के आयोजन एवं इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्थान स्वर्गीय संजय रंगा की स्मृति को समाज के लिए उपयोगी एवं सार्थक कार्यों के माध्यम से जीवित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बच्चों एवं दिव्यांगजनों के लिए अवसरों का सृजन, उनकी क्षमताओं की स्वीकार्यता तथा उन्हें सम्मानपूर्वक आगे बढ़ने के लिए सहयोग प्रदान करना संस्थान के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
आयोजकों ने बताया कि ‘प्रेरणा’ कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही है कि प्रत्येक बच्चे का अपना महत्व है। अलग-अलग क्षमताओं को स्वीकार करते हुए सभी बच्चों को आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना समाज की जिम्मेदारी है। बच्चों को उनकी रुचि, क्षमता और आवश्यकता के अनुसार सहयोग देकर उनके व्यक्तित्व और प्रतिभा का विकास किया जा सकता है।
इस मौके पर समाजसेवी शिवकुमार रंगा, अजय रंगा, प्रवीण रंगा, रोहित, शिवकुमारी, अमित पुरोहित, डॉ अंजून रंगा, प्रज्ञा व्यास, नेहा आचार्य, डाॅ रोहित किराडू, हरिहर व्यास, नीतेश रंगा, सुनीता आदि उपस्थित थे।
स्वर्गीय संजय रंगा की पुण्य स्मृति को समर्पित इस पहल के माध्यम से आयोजकों ने समाज में स्वीकार्यता, समान अवसर, सम्मान, सहयोग एवं सशक्तिकरण की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उनकी दूरदृष्टि और सामाजिक सरोकार ऐसे प्रत्येक प्रयास में जीवित रहेंगे, जो बच्चों एवं दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में किए जाएंगे।

BC

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