राजस्थान: महिला आरक्षण के बाद विधानसभा में बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी, 66 सीटें आरक्षित होने के आसार
राजस्थान: महिला आरक्षण के बाद विधानसभा में बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी, 66 सीटें आरक्षित होने के आसार
जयपुर। संसद में महिला आरक्षण बिल पास होने के बाद राजस्थान की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। आगामी विधानसभा चुनावों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना तय माना जा रहा है। वर्तमान 200 सीटों वाली विधानसभा में 33% आरक्षण लागू होने पर करीब 66 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार आरक्षित सीटों का अंतिम निर्धारण परिसीमन के बाद होगा। वर्तमान में विधानसभा में केवल 21 महिला विधायक हैं, जो कुल सदस्यों का बहुत छोटा हिस्सा है। ऐसे में यह बदलाव महिला प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
राजस्थान के इतिहास में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी सीमित रही है। 1952 के पहले चुनाव में एक भी महिला विधायक नहीं थी, जबकि सबसे अधिक 29 महिला विधायक 2008 के चुनाव में चुनी गई थीं। 2003 में Vasundhara Raje राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं, वहीं Sumitra Singh पहली महिला विधानसभा अध्यक्ष बनी थीं।
सीटें बढ़ने की भी संभावना
परिसीमन के बाद विधानसभा सीटों की संख्या 200 से बढ़कर 266 तक पहुंच सकती है। वहीं लोकसभा सीटें भी 25 से बढ़कर लगभग 33 होने की संभावना जताई जा रही है।
विकास कार्यों पर भी असर
सीटें बढ़ने से विकास कार्यों के लिए मिलने वाली राशि में भी बढ़ोतरी होगी। वर्तमान में 200 विधायकों को हर साल करीब 1000 करोड़ रुपये का विकास कोष मिलता है, जो 266 सीटें होने पर बढ़कर लगभग 1350 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। हालांकि, इससे वेतन-भत्तों पर खर्च भी बढ़ेगा।
कुल मिलाकर महिला आरक्षण लागू होने से राजस्थान की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और भूमिका दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
Join for Latest News
हमारे चैनल से जुड़ें और सभी अपडेट सबसे पहले पाएँ