20 साल पुराने आंख फोडऩे के मामले में फैसला, आरोपी की सजा बरकरार
20 साल पुराने आंख फोडऩे के मामले में फैसला, आरोपी की सजा बरकरार
बीकानेर। बीकानेर जिले के नापासर थाना क्षेत्र के सिंथल गांव में करीब 20 वर्ष पुराने मारपीट व गंभीर चोट के मामले में जिला एवं सेशन न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी है। न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को बरकरार रखा है। प्रकरण के अनुसार 15 दिसंबर 2004 की शाम को सिंथल निवासी बाबूलाल अपनी दुकान पर सामान रख रहा था। उसी दौरान गांव के ही कुछ लोग वहां पहुंचे और विवाद के बाद मारपीट शुरू हो गई। आरोप है कि झगड़े के दौरान आरोपी ने चाकू से बाबूलाल की दाईं आंख पर वार कर दिया, जिससे उसकी आंख गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के बाद परिजनों व ग्रामीणों ने घायल को पहले नापासर अस्पताल पहुंचाया, जहां से हालात गंभीर होने पर बीकानेर रेफर किया गया। इलाज के दौरान चिकित्सकों को उसकी आंख निकालनी पड़ी।घटना को लेकर नापासर थाने में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में चालान पेश किया गया। मामले की सुनवाई के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा आरोपी को दोषी ठहराया गया था।इस फैसले के खिलाफ आरोपी पक्ष ने जिला एवं सेशन न्यायालय में अपील दायर की थी। मामले की सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संया 7 बीकानेर ने साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और चिकित्सकीय रिपोर्ट का परीक्षण किया। न्यायालय ने पाया कि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों और मेडिकल साक्ष्यों से आरोपी द्वारा चाकू से हमला करना प्रमाणित होता है।अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि उपलध साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन का मामला सिद्ध होता है, इसलिए आरोपी की अपील स्वीकार करने का कोई आधार नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने निचली अदालत के निर्णय को यथावत रखते हुए अपील खारिज कर दी।
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