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विवाद की स्थिति में भी टीसी देने के सरकारी आदेश का विरोध, निजी स्कूल संचालकों ने बताया अव्यावहारिक

Bansal
6 months ago
विवाद की स्थिति में भी टीसी देने के सरकारी आदेश का विरोध, निजी स्कूल संचालकों ने बताया अव्यावहारिक


विवाद की स्थिति में भी टीसी देने के सरकारी आदेश का विरोध, निजी स्कूल संचालकों ने बताया अव्यावहारिक
बीकानेर। स्कूल एजुकेशन वेलफेयर एसोसिएशन (सेवा), राजस्थान ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक के उस आदेश पर कड़ा विरोध जताया है, जिसमें विवाद की स्थिति में भी अनिवार्य रूप से टीसी जारी करने के निर्देश दिए हैं। संगठन ने इस आदेश को निजी स्कूलों के अस्तित्व के लिए खतरा बताया है।स्कूल एजुकेशन वेलफेयरएसोसिएशन (सेवा) के प्रदेशाध्यक्ष कोडाराम भादू ने बताया कि विद्यालयों और अभिभावकों के बीच मुख्य विवाद फीस को लेकर होता है। नए आदेश के अनुसार, बिना बकाया शुल्क जमा कराए भी स्कूल को टीसी देनी होगी। चूंकि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अब अंक तालिकाएं ऑनलाइन जारी कर रहा है, इसलिए अभिभावक मूल अंक तालिका लेने स्कूल नहीं आते और फीस चुकाए बिना चले जाते हैं। संगठन का तर्क है कि सरकारी स्कूलों में यदि पांच रुपए की किताब या खेल सामग्री भी बकाया हो, तो बिना नो ड्यूज टीसी नहीं दी जाती। ऐसे में निजी विद्यालयों पर बिना शुल्क भुगतान के टीसी देने का दबाव बनाना अन्यायपूर्ण है। निजी स्कूल शिक्षकों के वेतन, भवन किराया और बिजली-पानी जैसे खर्चों का संचालन केवल छात्र शुल्क से करते हैं। शुल्क वसूली न होने से स्कूलों का आर्थिक संतुलन बिगड़ जाएगा। एक ओर सरकार आरटीई का भुगतान समय पर नहीं कर रही है और प्री-प्राइमरी कक्षाओं के पुनर्भुगतान को लेकर उदासीन है, वहीं दूसरी ओर ऐसे नियम थोपे जा रहे हैं। भादू ने बताया कि पूर्व में पारित बजट ट्रेजरी में फॉरवर्ड होने के बावजूद 31 मार्च तक ईसीएस न होने के कारण लेप्स हो गया। स्वीकृत बजट होने के बाद भी राशि स्कूलों के खातों में नहीं पहुंची, जिससे संस्थान आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। शिक्षा निदेशक को भेजे पत्र में आदेश में संशोधन कर नो ड्यूज की अनिवार्यता बहाल करने की मांग की है। इस विषय पर रणनीति तय करने के लिए रविवार को आवश्यक बैठक बुलाई है।

BC

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