पेपर लीक विधेयक में संशोधन को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी, अगले हफ्ते सदन में पेश हो सकता है बिल
पेपर लीक विधेयक में संशोधन को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी, अगले हफ्ते सदन में पेश हो सकता है बिल
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली में छात्रों का भारी विरोध प्रदर्शन जारी है। इस बीच, केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कैबिनेट मीटिंग में पेपर लीक विधेयक में संशोधन को मंजूरी मिल गई है। माना जा रहा है कि अगले हफ्ते तक सरकार सदन में इस बिल को पेश कर सकती है।
बता दें कि जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन बढ़ता ही जा रहा है। विरोध प्रदर्शन के बीच दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने अगले आदेश तक कई मेट्रो स्टेशन को बंद कर दिया है। इस दौरान कोई इंटरचेंज सुविधा भी उपलब्ध नहीं होगी।
17 मेट्रो स्टेशन पहले से बंद
दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के कारण मध्य दिल्ली के 17 मेट्रो स्टेशन पहले से बंद हैं। गुरुवार को डीएमआरसी ने राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच सुबह 7:30 बजे से अगले आदेश तक 17 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का फैसला लिया।
राजीव चौक, मंडी हाउस और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट जैसे स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट बंद कर दी गई थी, लेकिन इन अहम जंक्शनों पर इंटरचेंज की सुविधा चालू रखी गई।
नीट पेपर लीक को लेकर सड़क से लेकर संसद तक राजनीति गरमा गई है। इसी बीच मोदी सरकार ने पेपर लीक की घटनाओं पर सख्ती बरतते हुए कानून को और अधिक कठोर बनानी की तैयारी में हैं। शुक्रवार को मोदी कैबिनेट की बैठक में पेपर लीक पर सजा के कानून को सख्त बनाने से जुड़े बिल को मंजूरी मिल गई है।
इसके साथ ही विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों को कानूनी मान्यता देने और दोषियों के लिए 10 साल तक की जेल तथा 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान भी प्रस्तावित है। बताया जा रहा है कि संसद में इस बिल को अगले हफ्ते पेश भी किया जा सकता है।
नए प्रस्तावित संशोधनों के तहत पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाई जाएंगी। इन अदालतों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि जांच और कोर्ट का अंतिम फैसला तीन महीने के भीतर पूरा हो जाए। इससे वर्षों तक लंबित रहने वाले मामलों पर रोक लग सकेगी और दोषियों को जल्द सजा मिल सकेगी।
संगठित गिरोहों पर होगी कड़ी कार्रवाई
वहीं सरकार का फोकस उन संगठित नेटवर्क पर है, जो कई राज्यों में सक्रिय रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक कराने का काम करते हैं। नए प्रावधानों के तहत ऐसे गिरोहों के खिलाफ और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि उनके पूरे नेटवर्क को खत्म किया जा सके।
2024 के कानून को मिलेगी और मजबूती
बता दें कि सरकार जून 2024 में लागू किए गए पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 को और मजबूत करने की तैयारी कर रही है। इस कानून के तहत पहले से ही पेपर लीक, संगठित नकल, फर्जी अभ्यर्थी और परीक्षा से जुड़े कंप्यूटर सिस्टम में छेड़छाड़ को अपराध माना गया है। यह कानून NEET, JEE समेत सभी प्रमुख सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होता है।
अभी क्या है सजा का प्रावधान?
मौजूदा कानून के अनुसार पेपर लीक या अन्य अनुचित गतिविधियों में दोषी पाए जाने पर 3 से 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। संगठित पेपर लीक रैकेट से जुड़े लोगों के लिए 5 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 1 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान है। अब सरकार इन प्रावधानों को और सख्त बनाते हुए 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने और मामलों के त्वरित निपटारे की व्यवस्था लागू करना चाहती है।
क्या है सरकार का उद्देश्य?
केंद्र सरकार ऐसा व्यापक कानूनी ढांचा तैयार करना चाहती है, जिससे अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय पेपर लीक माफियाओं पर प्रभावी कार्रवाई हो सके, मुकदमों में देरी न हो और छात्रों का प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली पर भरोसा मजबूत बना रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हाल के दिनों में पेपर लीक मामलों में कड़ी कार्रवाई और त्वरित न्याय की आवश्यकता पर जोर दे चुके हैं।
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