सरकार ने सोनम वांगचुक पर लगा एनएसए हटाया, 170 दिन बाद जोधपुर जेल से रिहा; लेह हिंसा के बाद हिरासत में लिए गए थे
सरकार ने सोनम वांगचुक पर लगा एनएसए हटाया, 170 दिन बाद जोधपुर जेल से रिहा; लेह हिंसा के बाद हिरासत में लिए गए थे
जोधपुर। लद्दाख के सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक 170 दिन बाद जोधपुर सेंट्रल जेल से बाहर आ गए हैं। उन पर लगा नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) हटा दिया गया है। उनके जेल में रहने के दौरान कई बार उनके समर्थक मिलने पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने समर्थकों को मिलने नहीं दिया था।
इस दौरान सीकर सांसद अमराराम भी सोनम वांगचुक से मिलने पहुंचे थे, लेकिन उनको परमिशन नहीं मिली थी। वांगचुक को जोधपुर सेंट्रल जेल में शिफ्ट करने के अगले दिन चूरू का एक युवक उनके समर्थन में तिरंगा लेकर पहुंचा था, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
शनिवार को सुबह करीब 10 बजे सोनम की पत्नी गीतांजलि जोधपुर जेल पहुंची थीं। इसके बाद कागजी कार्रवाई पूरी की गई और फिर दोपहर सवा एक बजे दोनों प्राइवेट कार में पुलिस सुरक्षा के बीच जिले से बाहर निकले।
गहलोत बोले- 170 दिनों का हिसाब कौन देगा? सोनम वांगचुक के रिहा होने पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने ट्वीट किया। उन्होंने लिखा- एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक जी की रिहाई का समाचार सुखद है, परंतु यह पूरा प्रकरण केंद्र की मोदी सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
यह कैसी विडंबना है?
जो सोनम वांगचुक कभी प्रधानमंत्री मोदी जी की नीतियों के समर्थक रहे, जब उन्होंने लद्दाख के हक और पर्यावरण की आवाज उठाई, तो उन्हें NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) जैसी कठोर धाराओं में बांधकर जोधपुर जेल भेज दिया गया।
जिस व्यक्ति को कुछ माह पहले 'देश की सुरक्षा के लिए खतरा' बताकर जेल की सलाखों के पीछे डाला गया, उन्हें आज अचानक रिहा करने की बात आई यानी उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिले। ऐसे में उनकी हिरासत के 170 दिनों का हिसाब कौन देगा? उन्हें गिरफ्तार क्यों किया गया था?
क्या राष्ट्रीय सुरक्षा की परिभाषा अब भाजपा के राजनीतिक नफा-नुकसान से तय होगी? तानाशाही प्रवृत्ति से कानूनों का ऐसा 'सुविधाजनक इस्तेमाल' न केवल निंदनीय है, बल्कि हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी गहरा आघात है। देश की जनता इस दोहरे मापदंड को देख रही है।
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