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टैगोर की जयंती पर ‘मातृभाषा एवं बाल साहित्य’ विषयक गोष्ठी हुई

Bansal sadi
3 months ago
टैगोर की जयंती पर ‘मातृभाषा एवं बाल साहित्य’ विषयक गोष्ठी हुई

टैगोर की जयंती पर ‘मातृभाषा एवं बाल साहित्य’ विषयक गोष्ठी हुई

बीकानेर 07 मई, 2026। प्रज्ञालय संस्थान द्वारा अपने साहित्यिक एवं रचनात्मक आयोजनों के माध्यम से विशेष तौर से युवा पीढ़ी में साहित्य और उसमें भी मुख्य रूप से बाल साहित्य के प्रति पठन के प्रति लगाव की सोच के साथ समय-समय पर आयोजन किए जाते हैं। इसी कड़ी में आज देश ही नहीं विश्व के महान विद्वान ठाकुर रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर प्रात: ९.३० बजे लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन-सदन में ‘मातृभाषा एवं बाल साहित्य’ विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया।
विषय प्रवर्तन करते हुए राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि बाल साहित्य सृजन करना अपने आप में एक चुनौती है, साथ ही यदि बाल साहित्य बालक की मातृभाषा में हो तो उससे साहित्य की सार्थकता और अधिक हो जाती है। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने भी समृद्ध बाल साहित्य का सृजन अपनी मातृभाषा बांगला में किया था। जिसमें विशेष तौर से ‘काबुलीवाला’ ‘बादल और लहरें’ ‘छोटा-बड़ा आदमी’ जैसी महत्वपूर्ण कहानी, कविता की रचनाएं थी, जो अन्य भारतीय भाषाओं में अनुदित होकर पूरे भारत में पढ़ी गई। 
रंगा ने आगे कहा कि बाल साहित्य बालकों के मनोविज्ञान एवं उनकी अभिरूचि के अनुसार समकालीन संदर्भ के साथ सृजित होना आवश्यक है, तभी बाल साहित्य की सार्थकता है।  गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ शिक्षाविद्ï राजेश रंगा ने कहा कि बाल साहित्य पढऩे की प्रवृत्ति कम होना चिंताजनक है, जबकि पुस्तकें बालक की सच्ची मित्र होती हैं, और वे बालक की कल्पनाशीलता और भावनाओं को संबल देते हुए उसमें साहित्य के प्रति लगाव पैदा करती है। 
इस अवसर पर करूणा क्लब के हरिनारायण आचार्य ने कहा कि बालकों को बाल साहित्य पढऩे के साथ-साथ अपनी मातृभाषा के प्रति सजग रहकर उसे अपने जीवन व्यवहार में लाना चाहिए। इस गोष्ठी में हेमलता व्यास, नवनीत व्यास, कन्हैयालाल पंवार, राहुल सहित कई लोगों ने अपनी बात रखते हुए विषय के महत्व को रेखांकित किया। गोष्ठी का संचालन आशीष रंगा ने किया। अंत में सभी का आभार भवानी सिंह राठौड़ ने ज्ञापित किया।

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