अमेरिका ने ईरान पर लगातार 10वीं रात किए हवाई हमले, हूती विद्रोहियों ने सऊदी जहाजों की नाकेबंदी की दी चेतावनी
अमेरिका ने ईरान पर लगातार 10वीं रात किए हवाई हमले, हूती विद्रोहियों ने सऊदी जहाजों की नाकेबंदी की दी चेतावनी
वॉशिंगटन/तेहरान। मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिका ने मंगलवार को लगातार 10वीं रात ईरान के दक्षिणी हिस्सों में हवाई हमले किए। अमेरिकी सेना के अनुसार, इन हमलों में ईरानी सैन्य कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट, समुद्री सैन्य क्षमताओं तथा एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया गया।
ईरानी मीडिया के अनुसार, सीरिक, बंदर अब्बास, क़ेश्म द्वीप, चाबहार और कोनारक समेत कई इलाकों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। वहीं, ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसने हाल के घंटों में कुवैत के कैंप अरिफजान स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर तैनात HIMARS मिसाइल सिस्टम को निशाना बनाया। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
इस बीच, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की है। हूतियों का कहना है कि वे बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सऊदी जहाजों को निशाना बनाएंगे। यह जलमार्ग वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और दुनिया के लगभग 10 प्रतिशत व्यापार का आवागमन इसी मार्ग से होता है।
ईरान सीधे अमेरिकी युद्धपोतों या इजराइल पर बड़े हमले से क्यों बच रहा है?
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान अब तक अमेरिकी युद्धपोतों या इजराइल पर बड़े पैमाने पर सीधा हमला करने से बच रहा है। इसके पीछे कई रणनीतिक कारण माने जा रहे हैं—
सीधे युद्ध का खतरा: अमेरिकी नौसैनिक बेड़े या एयरक्राफ्ट कैरियर पर हमला अमेरिका की ओर से बड़े सैन्य अभियान को जन्म दे सकता है।
कड़ी सुरक्षा: समुद्र में तैनात अमेरिकी युद्धपोत अत्याधुनिक एयर डिफेंस और मिसाइल सुरक्षा प्रणालियों से लैस हैं, इसलिए उन्हें निशाना बनाना बेहद कठिन माना जाता है।
क्षेत्रीय दबाव की रणनीति: ईरान फिलहाल कुवैत, बहरीन और जॉर्डन जैसे देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर अमेरिका पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति: होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति होती है। समुद्री युद्ध बढ़ने पर वैश्विक ऊर्जा और व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है, इसलिए ईरान भी संघर्ष को सीमित रखने की कोशिश कर रहा है
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