राजस्थान में मंत्रियों की हनक पर सवाल: एक ने कांस्टेबल को लगाई फटकार, दूसरे पर गाली देने का केस दर्ज
राजस्थान में मंत्रियों की हनक पर सवाल: एक ने कांस्टेबल को लगाई फटकार, दूसरे पर गाली देने का केस दर्ज
जयपुर। राजस्थान सरकार के दो मंत्रियों के व्यवहार को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर सहकारिता मंत्री गौतम दक पर पुलिसकर्मी को कथित रूप से गालियां देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है, वहीं दूसरी ओर वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह एक कांस्टेबल को फटकार लगाते नजर आ रहे हैं।
सहकारिता मंत्री गौतम दक एक वायरल ऑडियो को लेकर विवादों में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे ऑडियो में दावा किया जा रहा है कि मंत्री ने चित्तौड़गढ़ जिले के डूंगला थाने में एक कांस्टेबल को अपशब्द कहे। आरोप है कि मंत्री अपने एक कार्यकर्ता के घर पुलिस के पहुंचने और कथित रूप से पैसे मांगने की शिकायत से नाराज थे। इसी मामले को लेकर वह थाने पहुंचे और वहां मौजूद पुलिसकर्मी से तीखी बहस हो गई।
वायरल ऑडियो को लेकर यह भी दावा किया जा रहा है कि बातचीत के दौरान कई बार आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया। मामला सामने आने के बाद मंत्री गौतम दक के खिलाफ पुलिसकर्मी को गाली देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। हालांकि मंत्री ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वायरल ऑडियो में उनकी आवाज नहीं है और यह संभवतः एडिटेड क्लिप हो सकता है।
उधर, वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा का एक वीडियो भी चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में वह सीकर में अपने काफिले की एस्कॉर्ट गाड़ी के चालक कांस्टेबल हरीश को एसी चलाने पर फटकार लगाते दिखाई दे रहे हैं। मंत्री वीडियो में डीजल बचाने और ऊर्जा संरक्षण की बात करते हुए कांस्टेबल का नाम नोट करने के निर्देश देते नजर आते हैं।
वायरल वीडियो में मंत्री यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री भी ईंधन बचाने का संदेश दे रहे हैं, ऐसे में अनावश्यक रूप से वाहन का एसी चलाना उचित नहीं है। हालांकि सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस पर सवाल उठाए हैं और भीषण गर्मी में ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों के प्रति संवेदनशीलता बरतने की मांग की है।
दोनों घटनाओं के सामने आने के बाद विपक्ष ने राज्य सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्षी दलों का कहना है कि सत्ता में बैठे जनप्रतिनिधियों को सरकारी कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। वहीं सोशल मीडिया पर भी इन मामलों को लेकर बहस तेज हो गई है और लोगों ने मंत्रियों के रवैये पर सवाल उठाए हैं। फिलहाल दोनों मामलों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है और घटनाओं की चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है।
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