पेपर लीक पर सियासत तेज: फास्ट ट्रैक कोर्ट के ऐलान के बाद मोदी-राहुल आमने-सामने
पेपर लीक पर सियासत तेज: फास्ट ट्रैक कोर्ट के ऐलान के बाद मोदी-राहुल आमने-सामने
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को घोषणा की कि देश में पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए त्वरित न्यायिक व्यवस्था लागू की जाएगी।
प्रधानमंत्री का यह ऐलान ऐसे समय आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्षी दल पेपर लीक के मुद्दे को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। वहीं, सोनम वांगचुक भी इस मुद्दे सहित विभिन्न मांगों को लेकर पिछले 26 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और उनका इलाज गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में चल रहा है।
राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना
प्रधानमंत्री की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं के भविष्य को सबसे अधिक नुकसान वर्तमान सरकार ने पहुंचाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था को कमजोर होने दिया गया और जिम्मेदार लोगों को संरक्षण दिया गया।
राहुल गांधी ने बुधवार को दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को हुए "संसद चलो मार्च" के दौरान छात्रों के साथ मारपीट की गई। उनका दावा था कि नीट पेपर लीक से करोड़ों छात्र और उनके परिवार प्रभावित हुए, लेकिन अब तक किसी दोषी को सजा नहीं मिली।
राहुल गांधी की तीन प्रमुख मांगें
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने सरकार के सामने तीन मांगें रखीं— केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कथित बल प्रयोग करने वालों पर कार्रवाई हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों से माफी मांगें।
पहली बार पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट
अब तक पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई सामान्य अदालतों में होती थी, जिसके कारण फैसले आने में कई वर्ष लग जाते थे। प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद पहली बार ऐसे मामलों के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाने की बात कही गई है, ताकि मामलों का शीघ्र निपटारा हो सके।
भारत में फास्ट ट्रैक कोर्ट की शुरुआत साल 2000 में 11वें वित्त आयोग की सिफारिश पर हुई थी। केंद्र सरकार के अनुसार, 2019 से 2025 के बीच रेप और POCSO मामलों के लिए गठित फास्ट ट्रैक अदालतों ने 3.06 लाख से अधिक मामलों का निस्तारण किया है। हालांकि, नए मामलों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण वर्ष 2025 के अंत तक बड़ी संख्या में मामले लंबित भी रहे।
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