अब बिना कनेक्शन खरीद सकेंगे गैस सिलेंडर, केंद्र का बड़ा फैसला, राजस्थान सरकार ने शुरू की तैयारी
अब बिना कनेक्शन खरीद सकेंगे गैस सिलेंडर, केंद्र का बड़ा फैसला, राजस्थान सरकार ने शुरू की तैयारी
जयपुर। केंद्र सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी हालिया आदेश के तहत प्रवासी श्रमिकों के लिए 5 किलोग्राम एफटीएल (FTL) गैस सिलेंडरों की दैनिक उपलब्धता को दोगुना करने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले के बाद राज्यों को पहले की तुलना में अधिक संख्या में छोटे गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे प्रवासी श्रमिकों को रसोई गैस की बेहतर सुविधा मिल सकेगी। राजस्थान में इस निर्णय को तत्काल प्रभाव से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है और संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार का यह कदम बेहद सराहनीय है और इससे राज्य में रह रहे प्रवासी श्रमिकों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि 5 किलोग्राम एफटीएल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति बढ़ने से राज्य में गैस वितरण प्रणाली और अधिक मजबूत होगी। छोटे सिलेंडरों की उपलब्धता बढ़ने से श्रमिकों को सस्ती और सुलभ रसोई गैस आसानी से मिल सकेगी, जिससे उनके दैनिक जीवन में सुविधा बढ़ेगी।
व्यवस्था को पारदर्शी बनाने पर जोर
गोदारा ने बताया कि विभाग की ओर से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निर्धारित मात्रा में सिलेंडर समय पर उपलब्ध हों और उनका वितरण सही पात्र लाभार्थियों तक पहुंचे। इसके लिए वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता न हो।
पहचान पत्र से मिलेगा सिलेंडर
उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल जरूरतमंद वर्ग को राहत देने वाली है, बल्कि राज्य में गैस आपूर्ति प्रबंधन को भी अधिक प्रभावी बनाएगी। छोटे गैस सिलेंडरों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन्हें प्राप्त करने के लिए स्थायी गैस कनेक्शन की आवश्यकता नहीं होती। प्रवासी मजदूर, छात्र और वे लोग जिनके पास स्थायी निवास का प्रमाण नहीं होता, वे भी केवल पहचान पत्र के आधार पर यह सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं।
इस सुविधा के कारण शहरों में काम करने वाले अस्थायी श्रमिकों और किराए पर रहने वाले लोगों को काफी सहूलियत मिलेगी। साथ ही, इससे स्वच्छ ईंधन के उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा और पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम होने की संभावना है। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से बड़ी संख्या में लोगों को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी रोजमर्रा की जरूरतें आसानी से पूरी हो सकेंगी।
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