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भजनों व माँ भारती के जयकारों से नरसी विला बना तीर्थस्थल : हजारों श्रद्धालुओं ने संत-महात्माओं के आशीर्वचन, मां भारती के प्रतिरूप एवं 65 फीट ऊंची धर्म ध्वजा का हुआ अनावरण

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4 months ago
भजनों व माँ भारती के जयकारों से नरसी विला बना तीर्थस्थल : हजारों श्रद्धालुओं ने संत-महात्माओं के आशीर्वचन, मां भारती के प्रतिरूप एवं 65 फीट ऊंची धर्म ध्वजा का हुआ अनावरण

भजनों व माँ भारती के जयकारों से नरसी विला बना तीर्थस्थल : हजारों श्रद्धालुओं ने संत-महात्माओं के आशीर्वचन, मां भारती के प्रतिरूप एवं 65 फीट ऊंची धर्म ध्वजा का हुआ अनावरण
संस्कृति से जुड़ाव ही नई पीढ़ी को बनाएगी संस्कारी : हरिभाऊ बागड़े
जो बटोरा जाए वो विषाद होता है और जो बांटा जाए वो प्रसाद होता है : साध्वी ऋतम्भरा
बीकानेर/सीलवा। देशभक्ति गीतों व भजनों तथा भारत माता के जयकारों की गूंज के साथ ही संत-महात्माओं के आशीर्वचन जन-जन में चेतना का प्रवाह कर रहे थे। यह भव्य और दिव्य नजारा था सीलवा के नरसी विला का। सनातन संस्कृति, धर्म जागरण और राष्ट्र चेतना के महाआयोजन के रूप में 28 फरवरी 2026, शनिवार को नोखा के सीलवा गांव स्थित नरसी विला संत श्री दुलारामजी कुलरिया का फलसा में विराट हिन्दू धर्मसभा का आयोजन हुआ। भंवर नरसी पूनम कुलरिया परिवार द्वारा आयोजित इस विराट हिन्दू धर्म सभा में हजारों श्रद्धालुओं और संत-महात्माओं की उपस्थिति से नरसी विला तीर्थनगरी जैसा परिलक्षित हो रहा था। अनुमानत: 22-23 हजार श्रद्धालुओं की उपस्थिति और संतों के ओजस्वी उद्बोधन ने इस विराट हिन्दू सभा को और भी दिव्य बना दिया। समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े का मुख्य आतिथ्य तथा साध्वी ऋतम्भरा का पावन सान्निध्य रहा। राष्ट्रगान से समारोह को शुरुआत करते हुए राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि सनातन धर्म विश्व की प्राचीनतम और समृद्ध परंपरा है। यह केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने की पद्धति है, जो करुणा, सेवा और समरसता का संदेश देती है। उन्होंने देश के गौरवशाली अतीत का उल्लेख करते हुए तक्षशिला और नालंदा जैसी प्राचीन शिक्षण परंपराओं को याद किया और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जुडऩे का संदेश दिया। 
सींथल पीठाधीश्वर श्री क्षमाराम जी महाराज ने अपने आशीर्वचनों में कहा कि नरसी कुलरिया परिवार पर प्रभु श्रीराम की कृपा है तभी सनातन धर्म के प्रति वे तत्पर रहते हैं। सनातन धर्म का मूल उद्देश्य आत्म कल्याण है। ऋषि-मुनियों से प्रेरणा लेनी चाहिए एकजुट होना होगा। संत-महात्माओं के दिखाए मार्ग पर चल कर ही सनातन की रक्षा हो सकेगी।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ राजस्थान के क्षेत्र प्रचारक निम्बाराम ने कहा कि हाल ही में पूरे राजस्थान में हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन हुआ, जिनका मुख्य उद्देश्य यही था कि लोगों में चेतना जगे। उन्होंने कहा कि सनातन का मतलब यह है कि जिसे कोई समाप्त नहीं कर सकता। हमारा धर्म सनातन है, हमारा राष्ट्र सनातन है। भारत देवताओं द्वारा निर्मित भूमि है, प्राकृतिक है, यह मनुष्य द्वारा बनाई हुई नहीं है।  धर्म सनातन व शाश्वत है वैसे हमारा राष्ट्र भी शाश्वत है। राष्ट्र के प्रति भक्ति का भाव जन-जन में जगना जरुरी है। हिन्दूत्व का अर्थ है जीओ और जीने दो, अहिंसा परमो धर्म, सर्व भवन्तु सुखिना यानि सबके सुख की कामना करने वाला है। जगदीश व जनक सुथार ने बताया कि गौसेवी संत श्री दुलाराम कुलरिया की धर्मपत्नी रामप्यारी देवी की प्रेरणा से नरसी विला के मुख्य द्वार पर मां भारती प्रतिरूप और धर्मध्वजा की स्थापना की गई तथा इसका लोकार्पण राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े व साध्वी ऋतंभरा के सान्निध्य में किया गया। कार्यक्रम में उगमाराम, मघाराम, कानाराम, भूराराम, शंकर, चिमाराम, धर्म, दीपक, सुखदेव, लालचंद, अशोक, जय, राजेश, नरेन्द्र, गोपी, मोहित, अभिषेक, जयंत, तनय, दिव्यंत, कृशिव, शिव, अजीत मांडण, ऋषभ चौपड़ा एवं पुखराज सुथार द्वारा अतिथियों का अभिनंदन किया गया। प्रेम कुलरिया ने बताया कि कार्यक्रम में गायक कलाकार प्रकाश माली ने भजनों की प्रस्तुति दी तथा तिलोक सुथार, ज्योतिप्रकाश रंगा, प्रदीप माकड़ ने मंच संचालन किया। 

साध्वी ऋतम्भरा ने कहा- धर्म व संत चिंतन करने वाले एवं हजारों युवाओं को हुनरमंद बनाकर रोजगार प्रदान करने वाले सच्चे राष्ट्रभक्त हैं नरसी कुलरिया
राम मंदिर आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाली एवं हिन्दुत्व की रक्षा करने में समर्पित साध्वी ऋतम्भरा ने अपने सम्बोधन में कहा कि अपनी जन्मभूमि को स्वर्ग कैसे बनाया जा सकता है यह संत श्री दुलारामजी कुलरिया के परिवार से सीखा जाए। पार्लियामेंट और भारत मंडपम में नरसी कुलरिया द्वारा किए गए इंटीरियर कार्यों की सराहना करते हुए साध्वी ऋतम्भरा ने कहा कि पद, धन कुछ भी स्थाई नहीं है लेकिन आपका हुनर और हजारों लोगों को हुनर सीखा कर रोजगार प्रदान करना वाकई सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रभक्ति है। धर्म और संतों का चिंतन करने वाले नरसी कुलरिया ने सदैव धर्म की ध्वजा को फहराया है। अपने उद्बोधन में परम स्नेही रामसुखदासजी महाराज का भी स्मरण किया। साध्वी ऋतम्भरा ने कहा कि खरपतवार इतनी न पैदा हो जाए कि फसल ही खराब हो जाए। हिन्दुओं के बच्चों को धर्म का ज्ञान होना चाहिए। हम भारतीयों की संतान तुलसी के पौधे हैं और तुलसी के पौधे वासनाओं की शराबों से नहीं संस्कारों के गंगाजल से सींचे जाते हैं। जो बटोरा जाता है वो विषाद होता है और जो बांटा जाता है वह प्रसाद होता है।


संतों का हुआ अभिनंदन
विराट हिन्दू धर्म सभा में सींथल पीठाधीश्वर श्री क्षमारामजी महाराज, हनुमानगढ़ी से श्री राजूदास जी महाराज, पोकरण विधायक श्री प्रताप पुरी जी महाराज, राष्ट्रीय संत श्री सरजूदास जी महाराज, शिवबाड़ी मठ के पीठाधीश्वर संवित् श्री विमर्शानंदगिरिजी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी कुशालगिरिजी महाराज, श्रीबालाजी धाम के महामंडलेश्वर श्री बजरंगदास जी महाराज, श्री जानकीदासजी महाराज, श्री चेतनरामजी महाराज, श्री बालभारती जी महाराज जैसलमेर, श्री विश्वकर्मा बोर्ड अध्यक्ष रामगोपाल सुथार का अभिनंदन किया गया तथा फैशन डिजाइनर रुमा देवी का स्वागत किया गया।

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