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महाजन में मिल रहा है लगातार जिंदा बम, आसपास मंडरा रहा है बड़ा खतरा, छोटी से गलती बन सकती है बड़े हादसे के कारण

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1 month ago
महाजन में मिल रहा है लगातार जिंदा बम, आसपास मंडरा रहा है बड़ा खतरा, छोटी से गलती बन सकती है बड़े हादसे के कारण


महाजन में मिल रहा है लगातार जिंदा बम, आसपास मंडरा रहा है बड़ा खतरा, छोटी से गलती बन सकती है बड़े हादसे के कारण
महेश देरासरी
 महाजन। भारतीय सेना की दक्षिण पश्चिमी कमान की ओर से विश्वस्तरीय ट्रेनिंग नोड के रूप में विकसित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज के आसपास बसे गांवों और महाजन कस्बे में आए दिन मिल रहे जिंदा बम एवं पुराने सैन्य अवशेष चिंता का विषय बने हुए हैं। पुलिस एवं प्रशासन की ओर से लोगों को ऐसे संदिग्ध वस्तुओं से दूर रहने और तत्काल सूचना देने के लिए जागरूक किया जा रहा है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। जानकारी के अनुसार वर्ष 1984-85 में महाजन क्षेत्र के 34 गांवों की भूमि का अधिग्रहण कर फील्ड फायरिंग रेंज की स्थापना की गई थी। रेंज बनने के बाद करीब एक दशक तक युद्धाभ्यास के दौरान निकलने वाले बमों के स्क्रैप को उठाने के लिए कोई ठेका व्यवस्था नहीं थी। इस दौरान महाजन सहित आसपास के गांवों के कई मजदूर परिवार चोरी-छिपे रेंज क्षेत्र में प्रवेश कर स्क्रैप एकत्रित करते थे। कई बार युद्धाभ्यास के दौरान नहीं फूटे जिंदा बम भी उनके हाथ लग जाते थे। इन्हें तोडऩे या खोलने के प्रयास में पूर्व में कई जानलेवा घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
लगातार सामने आ रहे जिंदा बम
महाजन क्षेत्र में पिछले करीब एक साल के दौरान अलग-अलग स्थानों पर जिंदा बम मिलने की कई घटनाएं सामने आई हैं। पुलिस ने समय रहते मौके पर पहुंचकर इन बमों को सुरक्षित करवाया तथा सेना के बम निरोधक दस्ते की मदद से उन्हें निष्क्रिय करवाने की कार्रवाई की। गत वर्ष जनवरी में महाजन कस्बे में कंवरसेन लिफ्ट नहर के किनारे दो जिंदा बम मिले थे। वहीं जुलाई में राजमार्ग किनारे निर्माणाधीन विद्युत निगम के सहायक अभियंता कार्यालय भवन के पास जिंदा बम मिलने से हडक़ंप मच गया था। हाल ही में महाजन के समीप एक खेत में भी जिंदा बम बरामद हुआ। इसके अलावा 14 जुलाई को फायरिंग रेंज से सटे जसवंतसर की रोही में जिंदा बम मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई।
अस्पताल परिसर में मिले थे 1400 जिंदा कारतूस
इस वर्ष 10 जनवरी को महाजन अस्पताल परिसर में मिट्टी में दबे करीब 1400 जिंदा कारतूस बरामद हुए थे। कारतूस काफी पुराने बताए गए थे। अस्पताल जैसे सार्वजनिक स्थान पर बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस मिलने से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हुए थे। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं से अंदेशा है कि फील्ड फायरिंग रेंज के आसपास के इलाकों में अभी भी पुराने सैन्य अवशेष, जिंदा कारतूस और विस्फोटक दबे हो सकते हैं। ऐसे में ग्रामीणों और किसानों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

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