निकाय चुनावों के लिए खर्चे में की गई बढ़ोतरी, अब इतने रूपए लगा सकेंगे पार्षद प्रत्याशी
खुलासा न्यूज,बीकानेर। प्रदेश में निकाय चुनावों की सुगबुगाहट के बीच चुनावी खर्च की सीमा तय कर दी गयी है। प्रदेश में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका चुनाव में प्रत्याशियों के लिए चुनाव खर्च की सीमा तय कर दी गई है। इसके साथ ही चुनाव लडऩे वाले प्रत्याशियों की गाड़ी की संख्या भी निर्धारित कर दी गई है।
आयोग की ओर से जारी गाइडलाइन के मुताबिक- मतदान (वोटिंग) वाले दिन अगर कोई प्रत्याशी गाड़ी का उपयोग करना चाहता है, तो उसे इसके लिए अलग से अनुमति लेनी होगी। वहीं, चुनाव कार्यालय (ऑफिस) पर लाउड स्पीकर लगाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध (बैन) रहेगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव में होने वाले खर्च के लिए सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को बजट का भी आवंटन कर दिया है। प्रदेश के 10 नगर निगमों में चुनाव के दौरान चुनाव कर्मचारियों के टीए और डीए के लिए आयोग ने सभी निर्वाचन अधिकारियों को कुल 10.31 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया है। वहीं, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों के चुनाव के लिए 19.33 करोड़ रुपए का बजट दिया गया है। आयोग ने प्रत्याशियों के चुनाव लडऩे के लिए जो गाइडलाइन जारी की है, उसमें हर प्रत्याशी को चुनाव परिणाम आने के 15 दिन बाद हर हाल में चुनाव खर्च का ब्योरा देने के लिए कहा है।
ये खर्चे किए गए है
नगर निगम में पार्षद पद के प्रत्याशी के लिए ढ़ाई लाख की सीमा से बढ़ाकर साढ़े तीन लाख कर दी गयी है। वहीं नगर परिषद में पार्षद के लिए डेढ़ लाख से ढ़ाई लाख तक कर दी गयी है। वहीं नगर पालिका में पार्षद प्रत्याशी के लिए एक लाख से बढ़ाकर ड़ेढ लाख कर दिया गया है ।
महिला आरक्षण 50 नहीं बल्कि 33 प्रतिश होगा
प्रदेश में होने वाले शहरी निकायों और पंचायतीराज चुनाव में महिलाओं के आरक्षण का अलग-अलग प्रतिशत रहेगा। शहरी निकाय चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत नहीं 33 फीसदी आरक्षण ही मिलेगा। वहीं पंचायतीराज चुनाव में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण रहेगा। कोर्ट के पुराने फैसले की वजह से शहरी निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं में महिला आरक्षण अलग-अलग रहेगा। पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनाव में एससी, एसटी, ओबीसी वर्गों में महिलाओं को आरक्षण उसी हिसाब से दिया जाएगा। स्वायत्त शासन विभाग ने 33 फीसदी महिला आरक्षण के हिसाब से लॉटरी की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पंचायतीराज विभाग 50 फीसदी महिला आरक्षण के हिसाब से अलग-अलग वर्गों के आरक्षण की लॉटरी तय करेगा। दोनों विभाग निकायों और पंचायतीराज संस्थााओं का आरक्षण तय कर राज्य निर्वाचन आयोग को ब्यौरा देंगे।
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