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ओलावृष्टि  गांवों के लिए आपदा बनकर आई, फसलों पर बिछ गई सफेद चादर उम्मीदों में फिर पानी

rk
1 month ago
ओलावृष्टि  गांवों के लिए आपदा बनकर आई, फसलों पर बिछ गई सफेद चादर उम्मीदों में फिर पानी


ओलावृष्टि  गांवों के लिए आपदा बनकर आई, फसलों पर बिछ गई सफेद चादर उम्मीदों में फिर पानी
बीकानेर ‌ शुक्रवार दोपहर जिले के बज्जू और आसपास के गांवों के लिए किसी आपदा से कम नहीं रही। कुछ ही देर पहले तक जहां खेतों में लहलहाती फसलें किसानों के चेहरों पर मुस्कान ला रही थीं, वहीं अचानक बदले मौसम ने सब कुछ छीन लिया। काली घटाएं छाईं, तेज हवाएं चलीं और फिर शुरू हुई ओलों की ऐसी बरसात, जिसने महज 20 मिनट में पूरा मंजर बदल दिया।
ओलों की मार इतनी जबरदस्त थी कि खेतों में खड़ी फसलें मानो किसी ने रौंद दी हों। चारों तरफ सफेद चादर बिछ गई, लेकिन यह सुंदर नजारा किसानों के लिए किसी मातम से कम नहीं था। जीरा, ईसबगोल, सरसों और चने की फसलें पूरी तरह तबाह हो गईं, जबकि गेहूं की फसल जमीन पर बिछकर बर्बादी की कहानी कह रही है।किसानों की आंखों में जहां कुछ दिन पहले अच्छी पैदावार के सपने थे, अब वहीं मायूसी और चिंता साफ नजर आ रही है। कर्ज, लागत और मेहनत सब कुछ इस बेमौसम मार के आगे बेबस दिख रहा है।स्थानीय किसान सुखदेव जाजड़ा का कहना है, हमने पूरी मेहनत और उम्मीद के साथ फसल तैयार की थी, लेकिन कुछ ही मिनटों में सब खत्म हो गया। अब हमारे पास कुछ नहीं बचा।
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द गिरदावरी करवाकर उचित मुआवजा देने की मांग की है, ताकि किसानों को इस मुश्किल घड़ी में राहत मिल सके। फिलहाल बज्जू का हर खेत, हर किसान इसी सवाल से जूझ रहा है कि आखिर इस नुकसान की भरपाई कैसे होगी?

Sanskar
BC

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