बीकानेर निवासी से 1600000 रुपए की ठगी, आरोपी भी बीकानेर के, ऐसे लिया झांसे में
बीकानेर निवासी से 1600000 रुपए की ठगी, आरोपी भी बीकानेर के, ऐसे लिया झांसे में
बीकानेर। साइबर क्राइम के एक मामले में अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो और फॉरेक्स ट्रेडिंग गिरोह सामने आया है जिसने बीकानेर के कालासर गांव में रहने वाले शख्स से 16 लाख रुपए की ठगी की। गिरोह के तार सीधे तौर पर दुबई से जुड़े हुए हैं। पुलिस ने बीकानेर, जयपुर और झुंझुनूं के 9 स्थानीय एजेंटों सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, अनियमित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम, और भारतीय न्याय संहिता की संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। साइबर ठगों ने बीकानेर के कालासर निवासी गोपीराम जाट से मुलाकात की। उसे गेमना पीर स्थित अपने कार्यालय ले गए और बताया कि XPO.ru रूस की वेबसाइट है जो फोरेक्स, सीएफडी क्रिप्टो करेंसी में ट्रेडिंग करती है। इसमें निवेश करने पर साप्ताहिक 4 से 5 प्रतिशत और मासिक 10 से 15 प्रतिशत गारंटेड प्रोफिट मिलेगा। विश्वास दिलाने के लिए वेबसाइट पर अकाउंट से कुछ प्रूफ दिखाए। इसके अलावा उच्च रिटर्न मिलने के फर्जी स्टेटमेंट भी दिखाए। रूस, दुबई की वैध कंपनी बताते हुए गोपीराम को झांसे में लिया और उसे निवेश करने के लिए तैयार किया।
उसने करीब 16 लाख रुपए निवेश कर दिए। बाद में जब मूलधन और लाभ मांगा तो आरोपियों ने साफ इंकार कर दिया। आरोपी ऑफलाइन, ऑनलाइन प्रमोटर या एजेंट बनकर सेमिनार, मीटिंग या सोशल मीडिया के जरिये प्रचार प्रसार कर लोगों से करोड़ों रुपए का निवेश करा चुके हैं और रुपए हड़प लिए। निवेशकों की राशि क्रिप्टो करेंसी में बदलकर दुबई या अन्य देशों में बैठे सरगनाओं तक पहुंचाई। इसके बदले में प्रमोटर्स ने अपना कमिशन लिया। गोपीराम ने साइबर पुलिस थाने में रिपोर्ट दी है। मुकदमा दर्ज किया गया है जिसकी जांच एएसआई खेताराम को सौंपी गई है।
साइबर ठगी के गिरोह में बीकानेर सहित, झुंझुनूं और जयपुर के लोग शामिल हैं। पुलिस को दी गई एफआईआर में जयपुर में मुरलीपुरा निवासी रजत शर्मा, झुंझुनूं निवासी ईश्वर वर्मा, सुरेन्द्र सैनी, विजय मोर्य, सुरेन्द्र बब्बर, बीकानेर में मुक्ताप्रसाद नगर निवासी अनिल शर्मा, सुजानदेसर निवासी रेणु कच्छावा, खारी चारणान निवासी रविनाथ कुमावत, राजेश जैन को आरोपी बनाया गया है।
इस पूरे खेल के पीछे एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट काम कर रहा है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि बीकानेर, जयपुर और झुंझुनूं के स्थानीय एजेंट (प्रमोटर्स) सिर्फ मोहरे थे, जिन्हें निवेशकों को फंसाने के लिए मल्टी-लेवल कमीशन मिलता था। ये स्थानीय एजेंट ऑफलाइन सेमिनारों के जरिए जनता से करोड़ों रुपए नकद या बैंक खातों में इकट्ठा करते थे। बाद में इस भारतीय मुद्रा को यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) में परिवर्तित कर दिया जाता था। इस डिजिटल करेंसी को बिना किसी कानूनी मंजूरी, आरबीआई या सेबी की अनुमति के, अवैध रूप से दुबई और अन्य देशों में बैठे मुख्य सरगनाओं के पास ट्रांसफर कर दिया जाता था।
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