रक्षाबंधन से पूर्व ही बहन ने अपने भाई के बांधा रक्षासूत्र
बीकानेर। रक्षाबंधन का त्यौहार भाई बहिनों की अटूट बंधन का त्यौहार है इस त्यौहार पर बहन कितनी भी दूर हो अपने भाई के रक्षासूत्र बांधन आ जाती है। भारतीय परंपरा में विश्वास का बंधन ही मूल है और रक्षाबंधन इसी विश्वास का बंधन है। यह पर्व मात्र रक्षा-सूत्र के रूप में राखी बांधकर रक्षा का वचन ही नहीं देता वरन प्रेम, समर्पण, निष्ठा व संकल्प के जरिए हृदयों को बांधने का भी वचन देता है। पहले रक्षाबंधन बहन-भाई तक ही सीमित नहीं था, अपितु आपत्ति आने पर अपनी रक्षा के लिए अथवा किसी की आयु और आरोग्य की वृद्धि के लिए किसी को भी रक्षा-सूत्र (राखी) बांधा या भेजा जाता था। इसी क्रम में शहर के अनिल बोडा, सुनील बोडा की बहन कुछ दिन पूर्व ही जोधपुर से आकर चंद्रकला बोहरा ने अपने भाइयों सुनील बोड़ा,अनिल कुमार बोड़ा,सरोज बोड़ा को राखी बांधकर अपना पवित्र रिश्ता जो पांच दशक से निभा रही हे का इस वर्ष भी निर्वाह किया।
उप जिला शिक्षा अधिकारी अनिल बोड़ा ने बताया कि उनके कोई भी सगी बहन नहीं होने के कारण बचपन से ही लगातार मौसी की बेटी बहन हर वर्ष राखी बांध इस पवित्र दिन को गरिमामई करती हे। चूंकि बहन का पीहर और ससुराल दोनों जोधपुर में हे अत: राखी वाले दिन आना संभव नहीं हो पाता अत: कुछ दिन पूर्व आकर हाथ में राखी बांध पवित्र रिश्ते को कायम रखा हुआ हे।पेशे से वरिष्ठ अध्यापिका रही चंद्रकला बोहरा हर वर्ष इस परम्परा को कायम रखे हुए हे।
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