नाबालिग के साथ दुष्कर्म व हत्या के मामले मेंं आरोपी को फांसी की सजा दिलाने का प्रयास रहेगा: आईजी
आईजी ओमप्रकाश ने पदभार किया ग्रहण
नाबालिग के साथ दुष्कर्म व हत्या के मामले मेंं आरोपी को फांसी की सजा दिलाने का प्रयास रहेगा: आईजी
बीकानेर। बीकानेर रेंज आईजी ओमप्रकाश ने कहा- आमतौर पर हम देखा करते हैं कि हम अच्छी प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं, मुल्जिम (आरोपी) पकड़ लिया। इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की और खुश हो गए। थोड़े दिनों बाद पता चलता है कि जिसका चालान पेश किया, वो बरी हो जाता है।इससे समाज और परिवादी खुद को ठगा हुआ सा महसूस करता है। अभी हाल ही में बीकानेर पुलिस ने जिस मुल्जिम को गिरफ्तार किया है, उसमें भी हमने स्पेशल पीपी को लाकर इसमें जांच के मुख्य पॉइंट को देखा है। ताकि आगे मुल्जिम किसी भी सूरत में बरी नहीं हो। महिला और पॉक्सो के मामलों में हमारा प्रयास रहता है कि उसको लगातार फॉलोअप करके फांसी की सजा दिलाएं। ऐसे प्रयास हमने पहले अजमेर और पाली में भी किए हैं।
आईजी ने बुधवार को बीकानेर में जॉइन करने के दौरान मीडिया से बातचीत की।
आरोपी को फांसी की सजा दिलाएंगे
आईजी ओमप्रकाश ने कहा- बीकानेर में नाबालिग लडक़ी के दुष्कर्म और हत्या के मामले में आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद अब उसे फांसी की सजा दिलाने का प्रयास रहेगा। उन्होंने कहा कि इस मामले के लिए स्पेशल टीम गठित करके जांच करवाई जा रही है। जल्द से जल्द चालान पेश करके इतनी मजबूती से अदालत में पक्ष रखेंगे कि पॉक्सो और महिला उत्पीडऩ के अभियुक्तों को फांसी मिल सके।
सीमा पर ड्रोन का मामला गंभीर
आईजी ओमप्रकाश ने कहा- सरहद पार से आने वाली ड्रग्स को लेकर आईजी ने कहा- मैं ष्ठढ्ढत्र सिक्योरिटी था तब भी मैंने इस पर काम किया था। के मामले में कभी भी कोई नया अपराधी नहीं आता है। पुराने प्लेयर्स ही ये काम करते हैं।
2022-23 में हमने देखा कि पंजाब के चालान शुदा अपराधी जिन पर 22-23 मुकदमे थे। वे दोबारा से अरेस्ट हो रहे थे। वो ही इसी धंधे में लगे हुए थे। जमानत होने के बाद फिर से इसी काम में लग जाते थे।
हमें इस मामले में दूसरे स्टेट से भी कोर्डिनेट करना होगा।
हर मुकदमा साइबर थाने में नहीं
आईजी ओमप्रकाश ने कहा- हम एक नया प्रयोग करेंगे। आम सी बात है कि ग्रामीण क्षेत्र में कोई साइबर से जुड़ा अपराध होता है तो कहते हैं- साइबर थाने जाइए। है मुकदमा साइबर थाने में दर्ज कराने जाए या जरूरी नहीं है।
इसके लिए छोटे थानों में 2-3 लोग ऐसे हो जो कॉल डिटेल निकाल सकें। डेटा का एनालिसिस कर लें, खाता ब्लॉक करवा सके। ये काम तो रूरल लेवल पर हो जाने चाहिए।
आमतौर पर होता है कि पीडि़त को साइबर थाने जाने का कहा जाता है। ऐसे में ग्रामीण आदमी साइबर थाने तक जाएगा जो वहां से 100 किमी दूर होगा। इतने तो उसे काफी डैमेज हो चुका होगा।
ऐसे में कोशिश करेंगे कि छोटे ग्रामीण थानों में भी कुछ दक्ष पुलिसकर्मी हो जो साइबर मामलों की जांच कर सकें।
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