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बीकानेर: एक हजार की रिश्वत मामले में इतने साल बाद अब पेश हुई चार्जशीट

Bansal
1 day ago
बीकानेर: एक हजार की रिश्वत मामले में इतने साल बाद अब पेश हुई चार्जशीट

बीकानेर: एक हजार की रिश्वत मामले में इतने साल बाद अब पेश हुई चार्जशीट 


बीकानेर। नगर विकास न्यास (अब बीडीए) में मकान निर्माण स्वीकृति की एवज में मात्र एक हजार रुपए की रिश्वत मांगने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 12 साल की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आरोपी रिटायर्ड सर्वेयर बद्रीराम के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी है। यह मामला इसलिए खास है क्योंकि आरोपी को रंगे हाथों नहीं पकड़ा जा सका था, इसके बावजूद एसीबी डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर में दर्ज रिश्वत मांग के पुख्ता सत्यापन के आधार पर धारा 7 पीसी एक्ट के तहत जुर्म प्रमाणित माना है।   जयनारायण व्यास कॉलोनी निवासी भंवरलाल ने 21 फरवरी, 14 को एसीबी में शिकायत दी थी कि उनकी रिश्तेदार सम्पत के नाम तिलक नगर (शिवबाड़ी) में यूआईटी का पट्टेशुदा प्लॉट है। निर्माण स्वीकृति के लिए 4000 रुपए सरकारी शुल्क जमा कराने के बावजूद फाइल अटकाई जा रही थी। यूआईटी कार्यालय पहुंचने पर तत्कालीन सर्वेयर बद्रीराम ने मौका मुआयना करने और जेईएन से स्वीकृति जारी करवाने की एवज में 1500 रुपए की मांग की और 1000 रुपए लेने पर सहमत हो गया। एसीबी ने उसी दिन डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर देकर रिश्वत की इस मांग का सत्यापन करवा लिया।

 सत्यापन के बाद एसीबी निरीक्षक सलावत खां के नेतृत्व में टीम ने 24, 25 और 26 फरवरी, 14 को लगातार तीन दिन ट्रैप का आयोजन किया। 24 फरवरी को टीम परिवादी के घर रही। फोन करने पर बद्रीराम ने पहले 10-15 मिनट और फिर आधा-पौन घंटे में आने का झांसा दिया, लेकिन शाम को काम का बहाना बनाकर टाल गया। अगले दिन 25 फरवरी को एसीबी टीम केमिकल लगे नोटों के साथ फिर परिवादी के घर तैनात रही, लेकिन इस बार आरोपी ने फोन ही नहीं उठाया। 26 फरवरी को टीम ने यूआईटी दफ्तर के बाहर जाल बिछाया, संपर्क भी हुआ मगर लेन-देन नहीं हो सका। इसके बाद 25 मार्च, 14 को यूआईटी ने बिना रिश्वत लिए ही निर्माण स्वीकृति जारी कर दी। आरोपी सर्वेयर को भनक लग चुकी थी कि उसके खिलाफ एसीबी में शिकायत हो चुकी है। 7 अप्रैल, 14 को परिवादी ने एसीबी को बताया कि बद्रीराम को कार्रवाई का पूरा संदेह हो गया है और अब ट्रैप संभव नहीं है, जिसके बाद परिवादी को उसकी मूल राशि लौटाकर ट्रैप समाप्त घोषित किया गया और मांग के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई। एसीबी ने जांच के बाद रिटायर्ड हो चुके सर्वेयर के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश कर दिया है।

BC

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