Khulasa Online
TM Jewellers
Bansal sadi
Breaking
• बीकानेर: अचानक पैर फिसल कर गिरा व्यक्ति, टांके में डूबने से हुई मौत • बड़ी खबर: निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरा, 6 मजदूरों की मौत, 3 को सुरक्षित निकाला गया • सुप्रीम कोर्ट सख्त: खतरनाक कुत्तों को दे मौत का इंजेक्शन! अधिकारियों को दिए निर्देश • NEET पेपर लीक मामले में पुणे का केमेस्ट्री प्रोफेसर गिरफ्तार, CBI ने बताया मास्टरमाइंड • मौसम अपडेट: मानसून तय समय से पहले देगा दस्तक, जाने राजस्थान में कब होगी झमाझम बारिश • बीकानेर: अचानक पैर फिसल कर गिरा व्यक्ति, टांके में डूबने से हुई मौत • बड़ी खबर: निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरा, 6 मजदूरों की मौत, 3 को सुरक्षित निकाला गया • सुप्रीम कोर्ट सख्त: खतरनाक कुत्तों को दे मौत का इंजेक्शन! अधिकारियों को दिए निर्देश • NEET पेपर लीक मामले में पुणे का केमेस्ट्री प्रोफेसर गिरफ्तार, CBI ने बताया मास्टरमाइंड • मौसम अपडेट: मानसून तय समय से पहले देगा दस्तक, जाने राजस्थान में कब होगी झमाझम बारिश
jeevan raksha
Sambhav Hospital
Bharti

आखिर क्यों मेडतियां प्रकरण में भाजपा ने बनाई दूरी, बार काउंसलिंग के अलावा भाजपा जिलाध्यक्ष ने भी नहीं दिखाई रुचि

rk
1 month ago
आखिर क्यों मेडतियां प्रकरण में भाजपा ने बनाई दूरी, बार काउंसलिंग के अलावा भाजपा जिलाध्यक्ष ने भी नहीं दिखाई रुचि

आखिर क्यों मेडतियां प्रकरण में भाजपा ने बनाई दूरी, बार काउंसलिंग के अलावा भाजपा जिलाध्यक्ष ने भी नहीं दिखाई रुचि 

बीकानेर। मेडतियां प्रकरण को लेकर भाजपा की दूरी बनाए रखने की चर्चा राजनीतिक और सामाजिक हलकों में लगातार हो रही है। इस मामले में न केवल पार्टी संगठन की सक्रियता सीमित दिखाई दी, बल्कि बार काउंसिलिंग के अलावा भाजपा जिलाध्यक्ष की ओर से भी विशेष रुचि नहीं दिखाई गई। इससे कई तरह के सवाल खड़े हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने इस प्रकरण में इसलिए सावधानी बरती क्योंकि मामला संवेदनशील और विवादास्पद माना जा रहा था। पार्टी नेतृत्व संभवतः किसी ऐसे मुद्दे से सीधे जुड़ने से बचना चाहता था, जिससे अनावश्यक राजनीतिक या कानूनी विवाद पैदा हो सकते थे। दूसरी ओर, स्थानीय स्तर पर यह धारणा भी बनी कि यदि पार्टी के जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी अधिक सक्रिय भूमिका निभाते, तो प्रभावित पक्ष को नैतिक समर्थन मिल सकता था। तीन दिन पहले कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल से भी प्रेसवार्ता में यह सवाल किया गया था। उन्होंने इस पर शहर अध्यक्ष सुमन छाजेड़ का नाम लेते हुए बात उन पर छोड़ दी थी। 


इसको लेकर बार काउंसिल जरूर आगे आया है।  कार्यवाहक सचिव विकास ढाका की ओर से डीजीपी को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि मामला एडवोकेट से जुड़ा होने के कारण पारदर्शिता जरूरी है। बार काउंसिल ने मांग की है कि जांच स्थानीय कनिष्ठ अधिकारी के बजाय अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) जैसे किसी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाए। महज एफआईआर के आधार पर मेड़तिया के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न हो। घटना के समय के सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, वीडियो रिकॉर्डिंग और स्वतंत्र गवाहों के बयानों की गहनता से तकनीकी जांच की जाए। इससे पहले बीकानेर बार एसोसिएशन ने भी इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी थी। 

ये था मामला 
यह विवाद कुछ दिनों पहले इंदिरा कॉलोनी में रात के समय लंबे समय तक बिजली गुल रहने पर शुरू हुआ था। आमजन की इस समस्या को लेकर भगवान सिंह मेड़तिया ने बिजली कंपनी बीकेसीईएल के अधिकारियों का घेराव किया था। मौके पर कानून-व्यवस्था संभालने पहुंची पुलिस टीम और वहां मौजूद एक नए आईपीएस अधिकारी के साथ मेड़तिया की तीखी बहस हो गई थी। चर्चा है कि इसी प्रशासनिक तनातनी के बाद बिजली कंपनी को आगे कर बीछवाल थाने में एफआईआर दर्ज करवा दी गई।

Join for Latest News

हमारे चैनल से जुड़ें और सभी अपडेट सबसे पहले पाएँ

Share: