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बडी खबर: निकाय चुनाव में बुजुर्ग व दिव्यांगों को बूथ पर जाकर वोट देना होगा, घर पर वोटिंग सुविधा नहीं मिलेगी, पर्चियों भी नहीं आयेगी

Bansal sadi
6 hours ago
बडी खबर: निकाय चुनाव में बुजुर्ग व दिव्यांगों को बूथ पर जाकर वोट देना होगा, घर पर वोटिंग सुविधा नहीं मिलेगी, पर्चियों भी नहीं आयेगी


बडी खबर: निकाय चुनाव में बुजुर्ग व दिव्यांगों को बूथ पर जाकर वोट देना होगा, घर पर वोटिंग सुविधा नहीं मिलेगी, पर्चियों भी नहीं आयेगी
बीकानेर ।  स्थानीय निकाय चुनाव में बीकानेर के बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं को वोट देने के लिए बूथ तक जाना होगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाव की तरह घर पर मतदान कराने की सुविधा नहीं दी है। साथ ही मतदाताओं के घर निर्वाचन आयोग की ओर से वोट की पर्ची भी नहीं पहुंचेगी। ऐसे में प्रत्याशी अपने स्तर पर पर्चियां बांट रहे हैं और मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाने की जिम्मेदारी भी खुद संभाल रहे हैं।
लोकसभा की तरह घर पर नहीं होगी वोटिंग
अगर किसी घर में बुजुर्ग या दिव्यांग मतदाता है तो परिवार को उन्हें बूथ तक लेकर जाना पड़ेगा। स्थानीय निकाय चुनाव में घर पर पोलिंग की सुविधा नहीं मिलेगी। बीकानेर में पिछले लोकसभा चुनाव में घर-घर वोटिंग हुई थी। इसके लिए बाकायदा एक टीम मतदाता के घर पहुंचती थी और बुजुर्ग व्यक्ति का वोट पूरी गोपनीयता के साथ लिया जाता था।
इस बार भी कई परिवारों को उम्मीद थी कि उनके घर पर वोट लेने के लिए दल आएगा, लेकिन ऐसा नहीं होगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने स्थानीय निकाय चुनाव में इस तरह की कोई सुविधा नहीं दी है। ऐसे में बुजुर्ग या दिव्यांग मतदाता को भी जैसे-तैसे बूथ पर ले जाकर ही वोटिंग करानी होगी।
पर्ची भी प्रत्याशी ही देंगे
लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मतदाता के घर पर निर्वाचन आयोग की ओर से भी वोट की पर्ची पहुंचती थी। स्थानीय निकाय चुनाव में ऐसा नहीं होगा। इस बार आयोग की तरफ से वोट की पर्ची नहीं भेजी जा रही है। ऐसे में प्रत्याशियों को ही घर-घर जाकर चुनाव की पर्ची पहुंचानी पड़ेगी।
कांग्रेस, भाजपा सहित निर्दलीय उम्मीदवार भी अपने स्तर पर पर्चियां तैयार करके मतदाताओं को वितरित कर रहे हैं।
वोटिंग बढ़ाने के प्रयासों का असर नहीं
वार्ड स्तर पर होने वाले चुनाव में वैसे भी वोटिंग ज्यादा होती है। इसी वजह से स्थानीय स्तर पर मतदान बढ़ाने के लिए इस बार खास प्रचार-प्रसार नजर नहीं आ रहा है। जिला प्रशासन की ओर से कुछ औपचारिक कार्यक्रम किए जा रहे हैं। संवाद जैसे कार्यक्रम भी हुए हैं, लेकिन लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तरह मतदान बढ़ाने के प्रयास नहीं हो रहे हैं।
एक-एक वोटर को बूथ तक लाने में जुटे प्रत्याशी
स्थानीय निकाय चुनाव में हर वार्ड में करीब चार से आठ हजार तक ही वोट हैं। ऐसे में प्रत्याशी खुद ही एक-एक वोटर को मतदान केंद्र तक लाने के काम में जुटे हुए हैं। बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं के लिए घर पर मतदान की सुविधा नहीं होने से उन्हें भी बूथ तक पहुंचाने की जिम्मेदारी परिवार और प्रत्याशियों पर ही रहेगी।

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